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उत्तर पूर्वी भारत में पर्यटन स्थल

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उत्तर पूर्वी भारत में पर्यटन स्थल

उत्तर पूर्वी भारत में पर्यटन स्थल

यदि आप प्रकृति की कच्ची, अनूठी सुंदरता का अनुभव करना चाहते हैं तो आपको उत्तर पूर्वी भारत की यात्रा अवश्य करनी चाहिए। भारत का उत्तर-पूर्वी भाग प्राकृतिक पर्यटन के क्षेत्र में काफी उन्नत माना जाता है। यहां मौजद पहाड़ी गांव, घाटियां, नदी, झरने-तालाब और यहां कि संस्कृति बहुत हद तक सैलानियों को यहां आने पर मजबूर करती है। भारत का पूर्वोत्तर भाग 7 राज्यों से मिलकर बना है, जिन्हे सात बहने कहकर भी संबोधित किया जाता है। ये सातों अपने प्राकृतिक खजाने के लिए पूरी दुनिया में जाने जाते हैं। भारत का उत्तर पूर्वी क्षेत्र पहाड़ों के अनुपम सौंदर्य, शांत नरम बहने वाली ब्रह्मपुत्र नदी, काजीरजंगा के एक सींग वाले गैंडों, डिब्रूगढ़ के विशाल चाय बगानों, सबसे बड़ा नदी द्वीप, जोरहाट में माजुली, नागालैंड की जनजातीय संस्कृति, मिजोरम के पहाड़ के किनारे, और शिलांग के शाश्वत सौंदर्य और सिक्किम की घटाओं के लिए विशेष रुप से जाना जाता है। यही वजह है भारत आने वाले ज्यादातर विदेशी पर्यटक पूर्वोत्तर की सैर का आनंद जरूर लेते हैं। भारत के उत्तर-पूर्वी राज्य सांस्कृतिक दृष्टि से काफी ज्यादा मायने रखते हैं। भारत के उत्तर पूर्वी राज्यों में ना केवल प्राकृतिक सुंदरता की अद्भुद झलक देखने को मिलती है बल्कि आपको यहां की संस्कृति एवं सभ्यता में रमने का अवसर भी प्राप्त होता है। भारत की सात बहनों के नाम से प्रसिद्ध इन राज्यों के उत्सव भी इन्हें खास बनाते हैं फिर वह चाहे बिहू उत्सव हो, या मणिपुर का नांगोल चाकोबा उत्सव। उत्तर पूर्वी राज्यों की तरह ही यहां के उत्सव एवं त्यौहार भी बहुत सुंदर है। भारत के यह राज्य भारत को उसके पड़ोसी देश जैसे नेपाल, भूटान एवं चीन इत्यादि से भी जोड़ते हैं। इनकी सीमाओं से लगे इन राज्यों में इन देशों की संस्कृति की झलक भी देखने को मिलती है। इस आर्टिकल के माध्यम से हम आपको उत्तर पूर्वी भारत के इन राज्यों के बारे में बता रहे हैं जहां आप अवश्य जाना चाहेगें और इनकी खूबसूरती में खो जाना चाहेगें।


असम

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भारत के उत्तर पूर्वी राज्य की शुरुआत होती है असम से। असम की राजधानी गुवाहाटी को उत्तर पूर्व की सात बहनों के प्रवेश द्वार जाना जाता है। यह राज्य अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है। असम के पर्यटक स्थल हमेशा पर्यटकों के दिलों पर कब्जा करने में सफल रहते हैं। खूबसूरत परिदृश्य, वन्यजीव अभ्यारण्य, ब्रह्मपुत्र और संस्कृति की सुंदर सुंदरता को देखते हुए, यह विभिन्न संस्कृतियों और जातियों से संबंधित लोगों का घर है। असम की भूमि विभिन्न शिल्पों का भी घर है। असम कई संस्कृतियों का भी घर है यहां कई त्यैहार एवं उत्सव मनाए जाते हैं जिनमें भोगली या माघ-भोगली(जनवरी),रोंगोली या बोहाग बिहू (अप्रैल),कोंगली या काती-बिहू(मई)बैशागु(मध्य अप्रैल में बोडो कछारी लोगों द्वारा) और अली-अई-लिगांग(मिशिंग जनजाति का पर्व) मनाया जाता है। बिहू का त्यौहार असम में तीन बार विभिन्न तरह से मनाया जाता है। जिसमें शामिल होकर आप यहां की संस्कृति से भी जुड़ सकते हैं।

प्राकृतिक सौंदर्य से मानव निर्मित आकर्षण तक, भारत के इस हिस्से में आनंद लेने और अनुभव करने के लिए बहुत कुछ है। असम की अपनी यात्रा पर असम के काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में जंगल का आप पता लगा सकते हैं जहां आप लुप्तप्राय एक-सींग वाले गैंडों को देख सकते हैं जो केवल इसी अभ्यारण्य में पाए जाते है। इसके साथ  ही माजुली- दुनिया का सबसे बड़ा नदी द्वीप असम में एक चिड़ियाघर का स्वर्ग है। एशिया की पहली तेल रिफाइनरी, डिगबोई तेल रिफाइनरी की यात्रा के बिना असम की यात्रा अपूर्ण है। यह वह जगह है जहां भारत में तेल निष्कर्षण के प्रारंभिक चरण की एक झलक हो सकती है। डिबूगढ़ शताब्दी संग्रहालय पर जाएं जो आपको शहर के इतिहास में अंतर्दृष्टि प्रदान करता है। कुछ सबसे प्रसिद्ध पर्यटन स्थल कामाख्या मंदिर, ब्रह्मपुत्र नदी क्रूज, गुवाहाटी प्लेनेटरीयम, गिब्बन वन्यजीव अभयारण्य, नवग्रह मंदिर, दीफू हैं जो असम की यात्रा में देखने वाले प्रमुख स्थल है।  यदि आप असम जाएं तो इन जगहों की यात्रा करना ना भूलें। यह जगह ना केवल आपको सुकुन देगें। बल्कि आपको एक अलग ही अनुभव  प्रदान कराएगें।



अरुणाचल प्रदेश

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अरुणाचल प्रदेश उत्तर पूर्वी बारत का एक और आकर्षक गंतव्य है। भारत के इस राज्य में कई अद्भुत गंतव्य हैं। अरुणाचल प्रदेश भूटान और चीन के साथ अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को साझा करता है। यह विवादित मैकमोहन लाइन के करीब है। अरुणाचल प्रदेश को आनंद लेने और तलाशने के लिए 'राइजिंग सन की भूमि' भी कहा जाता है क्योंति यहां सबसे पहले सूर्य का उदय होता है। आप यहां से सूर्य की अनुपम छटा को देख सकते हैं। यह छोटा राज्य बौद्ध मठों की बड़ी संख्या का घर है जिसमें तवांग मठ, बोम्मिला मठ, एनी गोम्पा मठ शामिल हैं। अरुणाचल प्रदेश साहसिक-पैक यात्रा के लिए भी सही है क्योंकि यहां आप राफ्टिंग, एनलिंग और ट्रेकिंग के लिए कई जगहें पा सकते हैं। जहां आप कई साहसिक गतिविधियों को कर रोमांचित हो सकते हैं। अरुणाचल प्रदेश की यात्रा पर तवांग युद्ध स्मारक का दौरा करना ना भूले जो कि 1962 के भारत चीन युद्ध में शहीद हुए सेनानियों का दृश्य दिखलाता है।  भारतीय सेना द्वारा बनाए गए इस स्मारक को भारतीय सैनिकों जो शहीद हुए है उन्हें समर्पित किया गया है। अरुणाचल प्रदेश पर्यावरण पर्यटन के लिए भी जाना जाता है और यात्रियों को अनदेखा पहाड़ों और घाटियों में चलने की सुविधा प्रदान करता है। नामदाफा राष्ट्रीय उद्यान, नूरानंग फॉल्स, मौलिंग राष्ट्रीय उद्यान अरुणाचल प्रदेश के कुछ अन्य प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों में से कुछ हैं। अरुणाचल प्रदेश में कई त्यौहार भी मनाए जाते हैं। जिनमें सियांग नदी उत्सव,न्योकुम(न्यिशी जनजाति द्वारा मनाया जाने वाला पर्व),लोसर उत्सव(नववर्ष के स्वागत हेतु),ड्री उत्सव,बोरी बूट(फसल की  सफल पैदावार हेतु),लोकू(शीत ऋतु की विदाई हेतु),संकेन(लोहित जिले की खाम्प्टी जनजाति द्वारा मनाया जाने वाला पर्व),पांगसाउ,संगीत का जिरो उत्सव,सोलुंग(कृषि उत्सव) इत्यादि शामिल है जिनका आप आनंद ले सकते हैं।




मणिपुर

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उत्तरी पूर्वी भारत की एक और सुदर राज्य मणिपुर है। लोकतक झील और केबुल लैमजाओ नेशनल पार्क के लिए प्रसिद्ध, जो दुनिया का एकमात्र फ़्लोटिंग राष्ट्रीय उद्यान है, वहब मणिपुर में ही स्थित है। मणिपुर अपनी जादुई सुंदरता और विविधीकरण विविधता के लिए प्रसिद्ध है। सुरम्य परिदृश्य से विदेशी वन्यजीवन, फ़्लोटिंग द्वीपों तक, मणिपुर के पास सब कुछ है। मणिपुर कभी भी अपनी सुंदरता और शांति में किसी को भी भटकने नहीं देता जो भी यहां आता है वो इसकी सुंदरता में मंत्रमुग्ध हो जाता है। मणिपुर को 'स्विट्ज़रलैंड ऑफ इंडिया' के रूप में भी जाना जाता है, जो सभी राज्यों के दौरे के पर्यटकों की कल्पना को पकड़ने के लिए काफी है। स्विट्डरलैंड की ही भांति यहां भी सुंदरता की कमी नहीं है। यह राज्य वनस्पतियों और जीवों में समृद्ध है। यहां लुप्तप्राय मणिपुरी सांगई हिरण का घर है। लोकतक झील, केबुल लैमजाओ नेशनल पार्क, सडु चिरु झरना, आरकेसीएस आर्ट गैलरी और संग्रहालय, थलॉन गुफा, निलाई चाय एस्टेट, मटाई गार्डन, खांगखुई गुफा, राज्य के कुछ प्रमुख आकर्षक स्थल है। इतिहास, संस्कृति और प्राकृतिक सुंदरता का एकदम सही मिश्रण, मणिपुर हर भाव में समृद्ध है, चाहे वह प्रकृति की सुंदरता या भूमि की संस्कृति में हो। मणिपुर में कई धार्मिक और सांस्कृति स्थल भी है जिनमें  गोविन्दजी मंदिरमणिपुर र सेन्दरा द्वीप खाम्बा(भगवन शिव का अवतार), थोइबी (पार्वती का अवतार) द्वारा भव्य वस्त्रों में विभिन्न मुद्राओं में नृत्य करना,रासलीला,पुंग चोलोम या करताल चोलोम इत्यादि प्रमुख है। आप यहां आए तो इन जगहों पर अवश्य जाएं।
 


मिजोरम

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मिजोरम सबसे अच्छे पूर्वोत्तर स्थलों में से एक है जो आगंतुकों को जबरदस्त प्राकृतिक सुंदरता और सुंदर परिदृश्य प्रदान करता है। आप निश्चित रूप से इस जगह से प्यार कर बैठेगें। यहां की सुंदरता देख आप इसके प्यार में पड़े बिना रह नहीं पाएगें। इस राज्य का नाम "मिजो" से मिलता है, जो देशी निवासियों के द्वारा दिया गया नाम है। मिजो पहाड़ों, घाटियों को कहते हैं। इनके सुंदर संयोजन के साथ प्रचुर मात्रा में  यह यहां उपलब्ध है। यह जगह छुट्टियों की यात्रा को फिर से जीवंत करने के लिए एकदम सही है। इस जगह की सबसे सुंदर बात यह है कि यह पूरे साल पर्यटकों का स्वागत करती है। मिजोरम के चित्रमय स्थान सिर्फ एक दृश्य खुशी नहीं है बल्कि आंतिरक शांति के लिए भी महान विषय प्रदान करते हैं। यहां फेंगपुई हिल्स के शानदार हरे पहाड़ियों या कैस्केडिंग वांटावांग झरने के मनोरम दृश्य बारत के अन्य राज्यों से इसे खास बनाते हैं। फॉन्गपुई, लेंगटेन्ग या मावर्रांग के लिए ट्रेकिंग टूर यात्रियों के लिए एक और खुशी का अवसर है। यह आपको यहां के कुछ ऑफबीट स्थलों पर ले जाता है। पलक झील, तंजोल, चिंगपुई का स्मारक मुरलेन राष्ट्रीय पार्क,तमदिल झील,रिहदिल झील,लेंगतेंग पहाड़ी  मिजोरम में अन्य प्रसिद्ध पर्यटक स्थल हैं। यहां के प्रमुख त्यैहारों में चपचारकूट उत्सव(बसंत उत्सव),मिमकुट,पॉलकुट,एंथुरियम,क्रिसमस इत्यादि है जिनमें शामिल होकर आप मिजोरम की संस्कृति से और भली भांति परिचित हो सकते हैं।




त्रिपुरा

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त्रिपुरा प्रकृति प्रेमियों के लिए एक आदर्श भूमि है। भव्य परिदृश्य, हरी-भरी घाटियां, और विशाल पहाड़ों के कारण यह जगह निश्चित रूप से आपके दिल को जीत लेने का दम रखती है। पांच पर्वत श्रृंखलाओं - बोरोमुरा, अथारामुरा, लोंगथराय, शाखन और जंपूई हिल्स द्वारा अंकित, यह एक सुंदरता से आशीर्वादित स्थल है। जिसे आप अपने जल निकायों, महलों, जंगल और वन्यजीवन के माध्यम से देख सकते हैं। यह देश का तीसरा सबसे छोटा राज्य,  है। त्रिपुरा का समृद्ध अतीत है, जो यहां पाए गए ऐतिहासिक स्मारकों और महलों से स्पष्ट होता है। गुमती वन्यजीव अभयारण्य, त्रिशना वन्यजीव अभयारण्य, रोवा वन्यजीव अभयारण्य और सेपाहिजाला अभयारण्य का दौरा करके त्रिपुरा के समृद्ध वन्यजीवन का आप साक्षी बन सकते हैं। यहां आप विभिन जीव-जंतुओं को देख सकते हैं। त्रिपुरा में यात्रा और आनंद लेने के लिए कई रोचक पर्यटक आकर्षण स्थल हैं। अगरतला त्रिपुरा की राजधानी में पता लगाने के लिए बहुत कुछ है। उज्जयंत पैलेस, कुंजान पैलेस, नेरमाहल पैलेस अगरतला में जाने के लिए कुछ प्रसिद्ध ऐतिहासिक स्थान हैं। धर्मपुगर त्रिपुरा में एक और महत्वपूर्ण शहर कालीबाड़ी मंदिर के लिए प्रसिद्ध है।जहां आप धार्मिक रुप से जुड़ सकते हैं। रोआ वन्यजीव अभयारण्य, अफ्लोंग, जंपुई हिल्स शहर के अन्य आकर्षण हैं। अगरतला के पास उदयपुर अपने भव्य मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है। गोमती नदी के तट कई मंदिरों और स्मारकों का घर है। भुवनेश्वरी मंदिर, नज़रूल ग्रंथगर, त्रिपुरा सुंदर मंदिर, मंदिरों के गुनाबाटी समूह, कल्याण सागर शहर के कुछ प्रमुख आकर्षण हैं। अंबास्सा ऐतिहासिक महत्व की एक और साइट है और इसमें लुभावनी परिदृश्य हैं। कमलासागर काली मंदिर, पिलक, कमलेश्वरी मंदिर, दुम्बोर झील, शहर के मुख्य आकर्षण हैं। यही नहीं त्रिपुरा प्राकृतिक रुप से संपन्न होने के साथ-साथ धार्मिक रुप से भी समृद्ध है। यहां कई त्यौहार अवं उत्सव मनाए जाते हैं जिनमें  गरिया पूजा,खर्ची पूजा,केर पूजा,दुर्गा पूजा तीर्थमुख (त्रिपुरा की जनजातियों का प्रमुख तीर्थस्थल) है इत्यादि उत्सव मनाए जाते हैं।




मेघालय

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मेघालय, बादलों का निवास स्थान है। मेघालय का नाम सुनते ही आपके सामने बारिश, हरे-भरे पेड़-पौधों का चित्र उभरने लगता है।  उत्तर-पूर्वी भारत के अद्भुत स्थानों में से मेघालय अपने वर्षावनों के लिए जाना जाता है। यह राज्य प्राकृतिक आकर्षण से भरपूर समृद्ध है जिसमें चोटियों, गुफाओं, झरने, झीलों और प्राचीन जीवित जड़ पुल शामिल हैं। यह पर्यटकों को विभिन्न प्रकार की जगहें, गतिविधियां, भोजन और त्यौहारों प्रदान करता है। मेघालय में बहुत सी चीजें हैं। आप यहां आन जगहों से अलग पेड़ों की जड़ों से बने पुल के देख सकते है उन पर चल कर रास्ता पार कर सकते हैं। बादलों के निवास की सुंदरता को देखने के लिए चेरापूंजी, उमियम झील, वार्ड झील, हाथी फॉल्स और शिलांग चोटी पर जाएं। खासी हिल्स और गारो हिल्स पर्वतारोहण, चट्टान चढ़ाई, ट्रेकिंग और लंबी पैदल यात्रा के रूप में कई साहसिक पर्यटन अवसर प्रदान करते हैं। प्रकृति के पैनोरमा का अनुभव करने के लिए हाथी फॉल्स, शदथम फॉल्स, नोक्कलिकाई फॉल्स, लैंगशियांग फॉल्स और स्वीट फॉल्स जैसे लोकप्रिय झरनों पर जाएं। जो यहां की सुंदरता में चार चांद लगाते हैं।  भव्य खिलौनों और खूबसूरत नदियों ऊबड़ इलाकों के माध्यम से अपना रास्ता बनाते हुए झरने आपका मन मोह लेगें । नोंगखनम द्वीप मेघालय के कुछ खूबसूरत स्थानों में से एक है जो नदियों का आनंद लेने के लिए आदर्श स्थल है। मेघालय की संपत्ति को कई प्राकृतिक चूना पत्थर और बलुआ पत्थर की गुफाओं का दौरा करके भी खोजा जा सकता है। यहां कई प्राचीन गुफाएं स्थित है जिनके बारे में आप जान सकते हैं। यह आपको काफी रोमांचित करेगा। इनमें से कुछ उपमहाद्वीप में सबसे लंबी और गहरी गुफाएं हैं। जेंटिया हिल्स में क्रेम लिआट प्रह और सिंरंग पामियांग पर्यटकों के बीच बेहद लोकप्रिय हैं। मेघालय के घने उष्णकटिबंधीय जंगल में गहरी, आप जीवित जड़ पुलों को पा सकते हैं। स्थानीय खासी जनजातियों द्वारा तैयार की गई, ये आश्चर्यजनक मानव निर्मित प्राकृतिक चमत्कार नदी या पहाड़ी ढलानों के विपरीत तटों पर लगाए गए रबड़ के पेड़ की जड़ों से बने होते हैं। इन पुलों को चेरापूंजी, नोंगतालंग, कुडेंग रिम और कुडेंग थिममाई गांवों के आसपास देखा जा सकता है। मेघालय निश्चित रूप से आपको अपनी शांति और सादगी के साथ आकर्षित करेगा और प्रकृति के साथ मूल्यवान समय बिताने का एक आदर्श गंतव्य है। यही नहीं यहा की संस्कृति एवं सभ्यता को जानने के लिए आप इनके त्यौहारों में शामिल हो सकते हैं जिनमें खासियों का पांच दिन तक चलने वाला महोत्सव,का पेम्ब्लांग नोंग्रेम नृत्य,जिसे नोंग्रेम नृत्य भी कहते हैं,शिलांग से 11 किमी. दूर स्मित गाँव में पर्तिवर्ष आयोजित किया जाता है। यहां आप मेघालय की जनजातियों को जान सकते हैं।



सिक्किम

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सिक्किम स्थित नाथुला दर्रा प्राचीन रेशम मार्ग का एक हिस्सा होने के साथ-साथ उत्तर पूर्वी भारत एक आकर्षक पर्यटन स्थल है। लोअर हिमालय में स्थित सिक्किम पर्यटकों के लिए एक स्वर्ग है। हरे घाट घाटियों और चमकदार नदियों ने दुनिया भर से प्रकृति प्रेमियों और वन्यजीवन उत्साही लोगों को आकर्षित किया है। सुंदर प्राकृतिक सुंदरता से गले लगाए गया, यह उत्तरपूर्वी राज्य शक्तिशाली कंचनजंगा के लुभावने दृश्य पेश करता है। यह दर्रा सिक्किम घूमने आए ट्रेकर्स और यात्रियों में मध्य काफी लोकप्रिय है। कहा जाता है कि आप यहां पहाड़ों को महसूस कर सकते हैं साथ ही यह जगह बेस्ट इको प्वाइंट के लिए भी जानी जाती है। जहां आप गहरी घाटियों और ऊंची चोटियों के माध्यम से अपनी गूंजती आवाज को सुन सकते हैं। इसके अलावा आप यहां हिमालय की खूबसूरत चोटियों को भी देख सकते हैं। बर्फ से ढके हुए पर्वत, झीलों, झरने, और सुरम्य घाटियों से घिरा हुआ, सिक्किम एक शानदार खुशी प्रदान करता है। यदि आप प्रकृति प्रेमी है तो यह जगह आपको अवश्य पंसद आएगी। आप यहां की सुंदर घटाओं को देख मंत्रमुग्ध हो जाएगें। विभिन्न और अद्वितीय छुट्टियों के अवसरों की एक बड़ी पेशकश भी सिक्किम प्रदान करता है। यह प्यारा छोटा हिमालयी राज्य बौद्ध मंदिरों और मठों की अपार संख्या का घर है। सिक्किम की राजधानी गंगटोक पर्वत श्रृंखलाओं की गोद में स्थित है और यह एक प्रमुख पर्यटन स्थल है। समुद्र तल की ऊंचाई में लगभग 5,500 फीट उपर स्थित यह बादलों का भी घर है। सिक्किम की यात्रा पर्वत ट्रेकिंग के उपक्रम के बिना अधूरा रहेगी। दार्जिलिंग - कंचनजंगा ट्रेक, सिंगलिला रिज और गोचा ला ट्रेक, वेर्से ट्रेक, युकसम टू डोजोंगरी और द गोचा ला ट्रेकिंग के लिए कुछ अंतिम गंतव्य हैं। एन्ची मठ, रूमटेक मठ, माली मठ जैसे रहस्यमय मठ राज्य और हिमालयी क्षेत्र में बौद्ध धर्म की संस्कृति और मूल्य दर्शाते हैं। जहां आपको सुंदर दृश्यों के साथ अनुपम शांति का एहसास होगा। त्सोमगों झील, बाबा मंदिर, नाथुला पास, शून्य प्वाइंट, गणेश टोक, गुरुद्वोंग झील, हनुमान टोक, बंजखरी फॉल्स सिक्किम के अन्य प्रसिद्ध स्थलों में से एक हैं।




नागालैंड

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नागालैंड उत्तर पूर्वी राज्यों का एक और सुंदर राज्य है। एक समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के साथ संयुक्त प्राकृतिक सौंदर्य को यदि आप महसूस करना चाहते हैं तको आप पूर्वोत्तर राज्य नागालैंड में आ सकते हैं। इसे ‘नाग भूमि’ अर्थात् सर्पों की भूमि भी कहते हैं| माउन्ट सारामती के बाद जाप्फू चोटी(3048 मी.) नागालैंड की दूसरी सबसे ऊँची चोटी है हॉर्नबिल महोत्सव के लिए प्रसिद्ध उत्तरी पूर्व भारत की यह आकर्षक भूमि दुनिया भर से पर्यटकों को आकर्षित करती है। विभिन्न जनजातीय संस्कृति का एक पिघलने वाला बर्तन हैय़ नागालैड मुख्य रुप से अपनी जनजातियों के लिए जाना जाता है।  यह देश के इस कम खोज वाले क्षेत्र को खोजने और अपने स्वदेशी जनजातियों के बारे में जानने का एक शानदार अवसर प्रदान करता है। नागा लोगों की भूमि अद्भुत प्राकृतिक सुंदरता से आशीर्वादित है। यहां, आपको नीले पहाड़, घने जंगल, सुंदर घाटियां और सुखद वातावरण मिलेगा।
कैस्केडिंग झरने, गहरी गुफाएं, लुभावनी वन्यजीवन, अद्भुत स्मारक और आकर्षक हस्तशिल्प भूमि का अतिरिक्त आकर्षण हैं। कोहिमा राज्य की राजधानी है जबकि दीमापुर नागालैंड का सबसे बड़ा शहर है। यहां छुट्टियां मजेदार हो सकती हैं क्योंकि यह आपको उत्तर पूर्व भारत के इस हिस्से का पता लगाने का मौका देती है। नागालैंड में कई उत्सव भी मनाए जाते हैं जिनमें शामिल होकर आप यहां की संस्कृति और सभ्यता को ज्यादा जान पाएगें। कोन्यक आओलिंग और फोम मोन्यु उत्सव,जनवरी में चखेसांग सुकरुन्ये उत्सव और फरवरी में कुकी मिम्कुत व अंगामी सेकरेंयी उत्सव इत्यादि नागालैंड के प्रमुख उत्सव एवं त्यौहार है।  रंगपाहर रिजर्व वन / जूलॉजिकल पार्क, ग्रीन पार्क, कोहिमा युद्ध कब्रिस्तान, कोहिमा राज्य संग्रहालय, वेद पीक, डोयांग नदी, जाफू पीक, इंटांगी वन्यजीव अभयारण्य, इंटांगी वन्यजीव अभयारण्य, माउंट पाउना पर्यटक गांव आदि नागालैंड में प्रमुख आकर्षणों और दर्शनीय स्थलों में से एक हैं। ये स्थल निश्चित रूप से अविस्मरणीय यादों के साथ आपकी छुट्टियों को और मजेदार और यादगार बना देगें।


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