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भारत के 8 ऑफबीट ग्रीष्मकालीन गंतव्य

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भारत के 8 ऑफबीट ग्रीष्मकालीन गंतव्य

भारत में ऑफबीट ग्रीष्मकालीन गंतव्य

यदि आप चिलचिलाती ग्रमी से राहत पाना चाहते हैं। और एक ठंडी और खबूसरूत जगहों का आनंद लेना चाहते हैं तो आप शिमला, मनाली, मसूरी, ऊटी, दार्जिलिंग और शिलांग जैसी भीड़-भाड़ वाली ठंडी जगहों का रुख करते हैं जहां आप शांति की तलाश में गए थे वहीं आप शोर-शराबा पाते हैं। जिसका कारण है कि यह जगह पर्यटकों के लिए जानने वाली जगह हैं जहां हर समय पर्यटकों की भीड़ लगी रहती है और आप शांति की तलाश में होने के बाद बी फिर से वहीं भीड़ महसूस करते हैं। लेकिन आपकी इसी खोज के लिए भारत में कई ऐसी जगह हैं जो आपको ग्रमी से तो राहत पहुंचाएंगी ही साथ ही अपने मनोहारी दृश्यों के साथ आपको ठंडक भी पहुंचाएगी। इन जगहों की सबसे बड़ी बात यह है कि यह जगह अभी भी पर्यटकों की भीड़-भाड़ से वंचित है और यही इन जगहों की सबसे ब़ड़ी खूबसूरती है। जहां आप अपने और अपने साथी के साथ एक शांतिमय पल बिता सकते हैं। इन जगहों के दृश्य आपका मन इस कदर मोह लेगें की आप बाकी अन्य जगहों को भूल जाएगें। इन जगहों की एक और खास बात यह है कि आप यहां आसानी से पहुंच सकते हैं और अपने पलों को व्यतित कर सकते हैं। यह गंतव्य आपको रोमांच से भी भर देते हैं। यहां कई साहिसक गतिविधियों का आयोजन भी किया जाता है जिनमें ट्रेकिंग, पैराग्लाइंडिग, वाटर सफ्रिगं इत्यादि प्रमुख है। कुदरत की इन हसिन वादियों के बारे में हम आपको इस आर्टिकल के माध्यम से बताने जा रहें है जो आपकी चिलचिलाती गर्मी से राहत पहुंचाएगीं और आपकी छुट्टियों को यादगार बनाएगीं। भारत के यह ऑफबीट ग्रीष्म कालीन गंतव्य हैः


मूरंग


भारत में ऑफबीट ग्रीष्मकालीन गंतव्य

हिमाचल प्रदेश के किन्नौर में स्थित, मूरंग एक शांत छुट्टी गंतव्यों की तलाश करने वालों के लिए एक सुरम्य स्थान है। सतलज नदी के किनारे स्थित मूरंग  आज भी पर्यटकों की नजरों से बेहद दूर है,जब आप किन्नौर घाटी को घूमते हुए निकलते हैं, तो आप इस खूबसूरत जगह का दीदार कर सकते हैं। मूरंग में आप उंचे उंचे पहाड़ों के साथ ट्रैकिंग का भी लुत्फ उठा सकते हैं। मूरंग में पर्यटकों के देखने के लिए काफी कुछ है। पर्यटक यहां पांड्वो द्वारा निर्मित किले को देख सकते हैं, किले का मुख्य द्वार अलग हो जाने वाले सीढ़ी के माध्यम से पहुंचा जा सकता है।  यह समुद्र तल से 3591 मीटर की दूरी पर स्थित है। यह छोटा गांव खुबानी बागों का एक शानदार दृश्य पेश करता है जिसकी ओर आप खींचे चले जाते हैं। यहां मन को शांति करने के लिए कई दर्शनीय स्थल भी हैं यहां कई ऐतिहासिक छोटे मंदिर स्थित हैं। खूबसूरत हसीन वादियों से घिरा है हिमाचल प्रदेश मूरंग में आप खुबानी से घिरा हुआ है और अप्रैल के महीन एमे यह जगह गुलाबी और लाल रंग के फूलों से पट जाती है, जो इसे और भी खूबसूरत बनाती है। इसके अलावा आप यहां मोरंग मठ और मोरंग मंदिर भी देख सकते हैं। यहां  तीन संरचनाये हैं जो उर्मिंग देवता को समर्पित है और इन्हें थ्वारिंग, गर्मंग, और शिलिंग शहरों में रखा गया है। देवता का सन्दूक इस किले के अंदर रहता है, लेकिन त्योहारों और अन्य पवित्र अवसरों के दौरान, सन्दूक को इन स्थानों तक ले लिया जाता है। देवता के कीमती सन्दूक को सोना, पीतल और चांदी से बनाया गया है और इसके 18 चेहरे या 'मुख' हैं। ये 18 मुख महाभारत के 18 दिनों का प्रतिनिधित्व करते हैं। गांव में पश्चिम में रेकॉन्ग पीओ अपने बेजोड़ सौंदर्य और सेब के बगीचों के लिए प्रसिद्ध है के साथ तहसील, निचार और रामपुर तहसील है। पास के कुछ प्रमुख शहरों में शिमला, तेहरी और मंडी शामिल हैं। आप यहां सरकारी लॉज में से रह सकते हैं। इसका निकटतम रेलवे स्टेशन शिमला है। आप चंडीगढ़ या दिल्ली से कार द्वारा भी यहां जा सकते हैं। आप अकेले में शहरी और पर्यटकों के कोलाहल से दूर खुद के साथ यहां कुछ वक्त बिता सकते हैं।

यात्रा करने का सबसे अच्छा समय - नवंबर से मार्च



मालशेज़ घाट


भारत में ऑफबीट ग्रीष्मकालीन गंतव्य

पश्चिमी घाट के दिल में यह पर्वत पास पहाड़ियों का मनोरम दृश्य पेश करता है। यह पुणे जिले में स्थित है। मालशेज़ घाट की मानसून की ठंडक का अहसास आपके आनंद को कई गुना बड़ा देगा। मानसून के चलते यहां के झरनों की सुंदरता और हरियाली इतनी बढ़ जाती है कि पर्यटकों की नजरें उन्हें निहारती ही रहती हैं। इस समय यहां आपको सैकड़ों तरह के फ्लोरा और फौना भी दिखेंगे। बारिश के सीजन में पुणेवासियों के लिए तो ये सबसे पसंदीदा जगह होती है। बारिश के दिनों में यहां का मौसम इतना निराला होता है कि प्रवासी पक्षी फ्लेमिंगो इस जगह पर सुदूर स्थलों से अपना डेरा डालने के लिए आते हैं। मालशेज घाट के प्राकृतिक स्थलों में आप पिंपलगांव जोगा बांध की सैर का भी आनंद ले सकते हैं। यह एक पांच किमी लंबा डैम है जो पुष्पावती नदी की तरफ चलता है। यह स्थल पक्षी विहार के लिए एक आदर्श स्थान माना जाता है। आप यहां कई दुर्लभ पक्षी प्रजातियों को देख सकते हैं। आपको यहां पित्ता, मोहन, एल्पाइन स्विफ्ट, ग्रीन पिजन आदि को देखने का मौका मिल सकता है। इन स्थानों के अलावा आप यहां आजोबा पहाड़ी के किले को देख सकते हैं। यह पहाड़ी स्थल एडवेंचर के शौकीनों के लिए जन्नत कहा जाता है, यहां ट्रेकिंग और रॉक क्लाइंबिंग जैसी गतिविधियों का आनंद जी भरकर लिया जा सकता है। यहां की यात्रा के बाद आप कई महीनों तक अपने को तरोताजा महसूस करेंगे। इतना ही नहीं, आपको यहां पर्यटन की विविधताओं का भी लुत्फ मिलेगा। मालशेज घाट में ठहरने के लिए यहां सबसे ऊंचाई पर स्थित महाराष्ट्र पर्यटन विभाग का गेस्ट हाउस भी एक बेहतरीन जगह पर है। गेस्ट हाउस के परिसर में घूमते हुए आप पर्वतों एवं घाटियों के सौंदर्य का आनंद ले सकते हैं। यहां से नीचे की ओर गहरी घाटियों को और मई से सितंबर महीनों में अनेक जलप्रपातों के सौंदर्य को निहारा जा सकता है। मालशेज घाट और इसके आसपास भीम नदी प्रवाहित होती है। मालशेज घाट कोंकण और डक्कन के पठार को जोडऩे वाला सबसे पुराना मार्ग है, इसलिए यह विश्वास किया जाता है कि बौद्ध भिक्षुओं ने यहां थोड़ी दूरी पर स्थित लेनयाद्री में गुफा मंदिरों का निर्माण कराया। मालशेज घाट के आसपास मात्र एक घंटे की ड्राइव के बाद कई आकर्षक स्थल हैं। इनमें अष्टविनायक मंदिर, शिवाजी की जन्म स्थली, नैने घाट, जीवधन और कुछ जल प्रपात प्रमुख हैं। आपको यहां घाटियों का सुंदर दृश्य देखने को मिलता है। दुर्लभ पक्षियों के साथ आप बाघ या तेंदुए को खोजने के लिए भाग्यशाली हो सकते हैं। एक और आस-पास का आकर्षण खेशेश्वर है जिसमें एक शानदार झरना है और यह एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल हरिश्चंद्रगढ़ के नजदीक है। आप जगह के चारों ओर कई छोटे होटल और रिसॉर्ट्स पा सकते हैं। मानसून के दौरान यात्रा में आपको सावधानी भी बरतनी चाहिए क्योंकि यहां चारों ओर कई भूस्खलन हैं।


यात्रा करने का सबसे अच्छा समय - अक्टूबर से अप्रैल


तवांग


भारत में ऑफबीट ग्रीष्मकालीन गंतव्य

यह ऐतिहासिक गांव प्राकृतिक सौंदर्य से आशीर्वाद प्राप्त है । बोम्मिला से 183 किमी दूर स्थित, यह क्षेत्र शांति के साथ आश्चर्यजनक एकांत प्रदान करता है। यह मुहर स्तर से 3500 मीटर ऊपर स्थित है। गुडपी चोंग-चुग्मी पर्वत के साथ क्षेत्र को घेरे हुए हैं। लुभावनी तवांग चू नदी और तवांग घाटी लोकप्रिय स्थानों हैं जिन्हें मछली पकड़ने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। आप बस से भी आसपास के सौंदर्य का आनंद ले सकते है। भारत के अन्य हिल स्टेशनो की तरह पर्यटको के लिए अत्यधिक आकर्षण का केंद्र न होने के बावजूद भी तवांग पर्यटन यहा के नैसर्गिक सौंदर्य और गुफाओ के लिए विश्व भर के पर्यटको में जाना जाता है। अरूणाचल प्रदेश राज्य का तवांग भारत और भूटान सीमा के पास लगभग 11155 फुट की उचांई पर बसा है। तवांग अरूणाचल प्रदेश का एक जिला भी है। सन् 1962 में यहा भारत और चीन के बीच भीषण युद्ध लडा गया। तवांग छठे दलाई लामा की जन्म स्थली भी है। अन्य आकर्षणों में संगतेसर झील और पीटीएसओ झील शामिल हैं, जिनमें दुर्लभ जानवरों और पक्षियों जैसे बर्फ कबूतर और कस्तूरी हिरण शामिल हैं। इस क्षेत्र में एक समृद्ध इतिहास भी है। महायान बौद्ध धर्म से लोकप्रिय तवांग मठ यहां गेलुकपा के साथ स्थित है, जिसे 17 वीं शताब्दी में 5 वें दलाई लामा-मेरा लामा लोदरे ग्याल्टो द्वारा स्थापित किया गया था। यह भगवान बुद्ध की 28 फीट की सुनहरी मूर्ति के साथ एशिया में दूसरा सबसे बड़ा मठ है। यह क्षेत्र उरगीलिंग मठ का घर है जिसे 6 वें दलाई लामा-थांग्यांग ग्यातो, छठे दलाई लामा के जन्मस्थान के रूप में जाना जाता है। यहां का नूरानांग वाटर फॉल को जंग फॉल के नाम से भी जाना जाता है। यहा पर आप पानी को 100 मीटर की ऊचांई से गिरते हुए देख सकते है जो बहुत ही रोमांचकारी प्रतित होता है। इस वाटर फॉल का नाम एक स्थानीय महिला के नाम पर रखा गया है। यहां कई अन्य छोटे मठ भी स्थित हैं। आप तेज़पुर, असम से सड़क यात्रा तक पहुंच सकते हैं। तवांग पर्यटन अपने खुबसूरत प्राकृति नजारो और ऐतिहासिक स्थलो के लिए जाना जाता है। जिसका आनंद उठाने के लिए यहा काफी संख्या में देशी और विदेशी पर्यटक यहा हर वर्ष आते है। ।

यात्रा करने का सबसे अच्छा समय
- मार्च से नवंबर (सर्दियों में यहां बहुत ठंड होती है)



चिकलाधर हिल स्टेशन


भारत में ऑफबीट ग्रीष्मकालीन गंतव्य

चिकलधर महाराष्ट्र में एकमात्र कॉफी उत्पादन को  बढ़ने वाला स्थान है। इसका नाम "किचका" के नाम पर रखा गया है। लोकगीत में कहा गया है कि भीम ने यहां खलनायक किचका को मार डाला था। पहाड़ी स्टेशन वास्तव में मज़ेदार है क्योंकि यह गहरी घाटियों, शांत स्थानों और प्रचुर मात्रा में वनस्पतियों और जीवों से भरपूर है। यहां के सहज झील, विशाल पेड़ और कैस्केड जैसे इसे एक आदर्श स्थल बनाते हैं।  चिखालदरा में आकर आपको यादगार पल बिताने का मौका मिलेगा। ये पर्वतीय क्षेत्र काफी खूबसूरत है। यहां पर हिमालय की पहाडियों में आप कुछ ज्यापदा एडवेंचर तो नहीं कर सकते लेकिन यहां का प्राकृतिक सौंदर्य आपको मंत्रमुग्धत कर देगा। यहां पर आप कई झीलें और गविलगढ़ किला देख सकते हैं।

यहां कुछ लोकप्रिय आकर्षण मेलघाट टाइगर परियोजना, ढकाना-कोलकाज राष्ट्रीय उद्यान, तूफान प्वाइंट, प्रॉस्पेक्ट प्वाइंट, जनजातीय संग्रहालय, गाविलगढ़ और नरनाला किले के लिए भ्रम, देवी प्वाइंट, सेमाडोह झील और पंडित नेहरू बॉटनिकल गार्डन है।  आप यहां ट्रेकिंग, लंबी पैदल यात्रा, पक्षी देखने या बस शिविर में जा सकते हैं। यहां मौसम सुखद है लेकिन सर्दियों में यहां ज्यादा ठंड पड़ती है। तापमान लगभग 10 डिग्री होता है।  चिकलधररा नागपुर से सड़क से आसानी से पहुंचा जा सकता है, जो निकटतम हवाई अड्डा भी है। निकटतम रेलवे स्टेशन बडनेरा है। प्रकृति से प्यार करने वालों के लिए यह एक पूर्ण ऑफबीट अवकाश गंतव्य है।

यात्रा के लिए सबसे अच्छा समय - पूरे साल के माध्यम से



हॉर्सली हिल्स


भारत में ऑफबीट ग्रीष्मकालीन गंतव्य

यदि आप वास्तव में बादलों को छूना चाहते हैं, तो आपको आंध्र प्रदेश के चित्तूर की हॉर्सली हिल्स जाना चाहिए। आंध्र प्रदेश का यह स्थल बहुत ही सुंदर है। खासतौर पर अगर आपको हरियाली पसंद है तो आप इसके मुरीद हो जाएंगेष तिरुपति मंदिर से 144 किलोमीटर की दूरी पर स्थिकत हॉर्सले हिल्स का सबसे बड़ा आकर्षण का केन्द्र है यहां पहाड़ियों, जिन्हें आर्चेन्स भी कहा जाता है, सबसे पुरानी भूगर्भीय हैं। यह समुद्र तल से 1,314 मीटर ऊपर स्थित है। यह ऑफबीट स्थान वास्तव में अद्वितीय और अनियमित वातावरण प्रदान करता है। आप पूर्वी घाटों के लुभावने दृश्य देख सकते हैं। समृद्ध वन्यजीवन, पत्ते और शांत जलवायु की वजह से हॉर्सली हिल्स को 'आंध्र ऊटी' भी कहा जाता है।

यहां आपको कुछ स्थानों पर विशेष रुप से जाना चाहिए जिनमें सबसे पुराना बरगद का पेड़ शामिल है जिसे थिम्माम्मा मारिमानु कहा जाता है। कल्याणी पेड़ नामक एक और पेड़ 148 वर्षीय नीलगिरी का पेड़ है। यहां दो प्राचीन झीलों, अर्थात् झील गंगोत्री और मानसरोवर को सूखने के लिए जाना जाता है। प्रकृति प्रेमियों के लिए, ईईसी केंद्र या पर्यावरण पार्क है। आप गाली बांदा या हवा चट्टान पर घंटों तक भी बैठ सकते हैं। आप सड़क से पहाड़ियों तक पहुंच सकते हैं। यह बैंगलोर से 140 किमी और हैदराबाद से 524 किमी दूर है।

यात्रा के लिए सबसे अच्छा समय: अक्टूबर से मई तक



कदमत द्वीप समूह


भारत में ऑफबीट ग्रीष्मकालीन गंतव्य

यदि आप कुछ शांति और साहसिक गतिविधियों वाले स्थलों की तलाश में हैं तो लक्षद्वीप का कदमत द्वीप समुह आपके लिए एकदम सही स्थान है। कदमत द्वीप 8 कि.मी. लम्बा और 550 मीटर चौड़ा है। इसका कुल क्षेत्रफल 3.20 वर्ग कि.मी. है। इसके पश्चिम के ख़ूबसूरत उथले लैगून वाटर स्पोर्ट्स के शौक़ीनों को बहुत प्रिय हैं। कदमत के पूर्व में एक संकरा लैगून है। यहां आप कई साहसिक जल क्रीडाओं को कर सकते हैं। स्नॉर्कलिंग, स्कूबा डाइविंग और समुद्री जीवन की खोज यहां कुछ लोकप्रिय खेल हैं। यहाँ गहरा नीला पानी किसी स्वर्ग से कम नहीं लगता। इसकी ठंडी हवा, समुद्र की लहरों की आवाज आपको एक अद्भुद आनंद प्रदान करती है। यहां पर बैठक सूरज का नजारा एक अनुपम दृश्य हैं। लक्षद्वीप में स्थित, कदमत द्वीपों में समुद्री जानवरों के साथ स्पार्कलिंग कोरल रीफ को भी आप देख सकते हैं। यह अमिनी द्वीप के उत्तर पूर्व की ओर लगभग 5 किमी स्थित है। समुद्र का प्रभाव यहां मध्यम है और उथले होने के कारण, यह समुद्र तट पर तैराकी और लाउंजिंग के लिए आदर्श है। विदेशी समुद्री भोजन के साथ आरामदायक आवास प्रदान करने के लिए क्षेत्र में कई होटल उपलब्ध हैं। यह निश्चित रूप से एक ऑफबीट स्थल है जिसे आप छोड़ना नहीं चाहेंगे! निकटतम हवाई अड्डा आगाट्टी हवाई अड्डा है। वहां से आप द्वीप तक पहुंचने के लिए एक नाव ले सकते हैं।

यात्रा के लिए सबसे अच्छा समय - अक्टूबर से मई



वेर्सी रोडोडेंड्रॉन अभयारण्य


भारत में ऑफबीट ग्रीष्मकालीन गंतव्य

यदि आप किसी अभ्यारण्य की तलाश में हैं जो आपको सुंदर दृश्य प्रदान करें तो आप सिक्किम के वेर्सी रोडोडेंड्रॉन की सैर की योजना बना सकते हैं। सिंगलीला नेशनल पार्क और खांगचेन्ज़ोंगा बायोस्फीयर रिजर्व के बीच यह सही है। समुद्री स्तर से लगभग 300o मीटर की ऊंचाई पर 104-वर्ग किमी से अधिक की दूरी पर ऑफबीट और छोटा अभयारण्य फैल गया है। प्रकृति प्रेमियों के लिए, यहां अन्वेषण करने के लिए बहुत सारी जैव-विविधता है। अप्रैल-मई के आसपास खिलने वाले रोडोडेंड्रॉन विशेष आकर्षण हैं। वेर्सी रोडोडेंड्रॉन एक खूबसूरत वन क्षेत्र है जो आदर्श जैव विविधता को प्रदर्शित करने का काम करता है। यह अभयारण्य फूलों की रोडोडेंड्रोन प्रजाति के लिए जाना जाता है, जो मार्च से अप्रैल के बीच यहां की सुंदरता को बढ़ाती हैं। खास इन गुलाबी फूलों को देखने के लिए यहां दूर-दराज से सैलानियों का आगमन होता है। मार्च और अप्रैल के बीच यहां पर्यटकों का भारी जमावड़ा लगता है। यहां का मुख्य जीव रेड पांडा है, जो देखने का काफी खूबसूरत होते हैं। आप यहां पक्षियों की विभिन्न प्रजातियों को भी देख सकते हैं। आप यहां वन लॉज में रह सकते हैं। यह क्षेत्र हिले, डेंटम और सोरेंग से सड़क से पहुंचा जा सकता है।

यात्रा के लिए सबसे अच्छा समय - अक्टूबर से मई



होनेमरडु


भारत में ऑफबीट ग्रीष्मकालीन गंतव्य

होनेमरडु शिमोगा जिले के शारवती नदी के बैकवाटर के साथ कर्नाटक राज्य में घिरा हुआ एक छोटा सा गांव है। इस क्षेत्र में कयाकिंग जैसे सुनहरे रेत और पानी की गतिविधियां आकर्षण का केन्द्र है। होनेमरडु में यात्रा करने के लिए एक लोकप्रिय जगह, कलासी सर्वश्रेष्ठ अर्थात् अपने जुड़वां शिव मंदिर, भगवान नीलकंठेश्वर मंदिर और भगवान मल्लिकार्जुन मंदिर के लिए जाना जाने वाला एक शहर है। यह शहर सागर शहर से 8 किमी दूर स्थित है और सोरब रोड से होकर जोग फॉल्स से जुड़ा है। यदि पानी के खेल आपको आकर्षित नहीं करते हैं तो यहां कुछ दुर्लभ प्रजातियों के पक्षी भी आप देख सकते हैं। होनेमरडु में जॉग फॉल्स के पास स्थित सागर, शिमोगा जिले में एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल है। इस शहर इक्केरी और केलादी जैसे ऐतिहासिक स्थलों के पास स्थित है, जहां सदाशिव नायक, केलादी राजवंश से संबंधित एक राजा द्वारा सदाशिव सागर झील बनाई गयी थी। झील को अब गणपति केरे के नाम से जाना जाता है। आप उसका आनंद ले सकते हैं।

यहां के घने जंगल एक प्राकृतिक ताजगी लिए ताजा हवा प्रदान करते हैं, बिना किसी प्रयास के आप सुखद मौसम में घंटों तक ट्रेकिंग और पैदल चलने का आनंद लें सकते हैं। यहां के क्षेत्र सड़कों से अच्छी तरह से जुड़े हुए है। निकटतम हवाई अड्डा मैंगलोर है और निकटतम रेलवे स्टेशन में शिमोगा और सागर शामिल हैं।

यात्रा के लिए सबसे अच्छा समय - अगस्त से जनवरी तक

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