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भारत के ऐतिहासिक स्थल

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भारत के ऐतिहासिक स्थल

भारत एक समृद्ध ऐतिहासिक भूमि है। भारत के हर कोने में एक इतिहास छुपा है जो ना केवल भारत की संप्रभुता एवं अंखडता का प्रतिक है बल्कि भारत की संस्कृति की जीवंत उदाहरण है। भारत में कई ऐसी ऐतिहासिक चीजें उपलब्ध है जो भारत के गौरवमयी इतिहास को प्रदर्शित करती है। भारत एक ऐसा देश है जहां आदि काल से लेकर मध्य काल एवं वर्तमान काल तक के साक्ष्य मौजूद हैं। यहां प्राचीन भारत की सभ्यता को प्रदर्शित करती हड़प्पा कालीन संस्कृति के भी प्रमाण है और धार्मिक परंपराओं को दिखलाते सांची के स्तूप भी स्थित है। यहां मध्य कालीन भारत से जुड़े अनेकों स्थल है फिर चाहें वह दिल्ली का कुतुबमीनार, हुमायु तुंब एवं लालकिला हो या आगरा का ताजमहल, अंजता की प्राचीन गुफाओं से लेकर वर्तमान के इंडिया गेट तक ऐसी कई प्राचीन और नवीनतम ऐतिहासिक इमारतें, झरने, मंदिर एवं गुफाएं भारत में स्थित हैं जो भारत को एक अतुल्य भारत का दर्जा प्रदान करती हैं। भारत भ्रमण करने के लिए एवं भारत को और करीब से जानने के लिए आप इन स्थलों का दौरा अवश्य करें जो ना केवल आपकों भारत के समृद्ध इतिहास की जानकारी देगा बल्कि आपकों भारत की एक ऐसी यात्रा पर ले चलेगा जहां आपकों स्वंय का जानने का मौका मिलेगा। 

भारत के ऐतिहासिक स्थल

भारत के राज्यों के ऐतिहासिक स्थल

भारत का प्रत्येक राज्य अपनी विशिष्ट संस्कृति और जीवंत परंपराओं, जनजातियों, भाषाओं और ऐतिहासिक अतीत के साथ अनेकों तारों में ध्रुव तारें के समान चमकता है। भारत के हर राज्य का अपना ही अतीत, अपना ही इतिहास है जो उसे अपने आप में बहुत खास बनाता है। आइए हम भारत के विभिन्न राज्यों में ऐतिहासिक स्थानों के बारे में और जानें।
आंध्र प्रदेश: विजयवाड़ा, कुर्नूल, नेल्लोर, गुंटूर, कदप्पा
असम: जोरहाट
बिहार: बक्सर, पटना, सीवान, पूर्वी चंपारण
छत्तीसगढ़: भिलाई
गुजरात: राजकोट, भरूच, गांधीधाम, आनंद, वापी, उदवाड़ा
हरियाणा: करनाल, सोनीपत, पानीपत
हिमाचल प्रदेश: सोलन
जम्मू-कश्मीर: कारगिल, लेह
झारखंड: जमशेदपुर, बोकारो, हजारीबाग, कोडरमा
कर्नाटक: होस्पेट, बीजापुर, गुलबर्ग, बेलगाम, बिदर, कोझिकोड
मध्य प्रदेश: ग्वालियर, रतलाम, सागर, इंदौर, छतरपुर, भिंड
महाराष्ट्र: चंद्रपुर, एलोरा, पुणे, वर्धा, अलीबाग, रत्नागिरी
मणिपुर: इम्फाल
नागालैंड: कोहिमा
उड़ीसा: राउरकेला
पंजाब: कपूरथाला, अमृतसर, फिरोजपुर, रणथंभौर
पुदुच्चेरी: यानम पुदुच्चेरी
राजस्थान: मांडवा, भरतपुर, उदयपुर, कोटा, श्रीगंगानगर
तेलंगाना: करीमनगर, हैदराबाद, वारंगल

भारत के इन सर्वश्रेष्ठ ऐतिहासिक स्थानों पर आपको अवश्य जाना चाहिए

भारतीय इतिहास इतना समृद्ध है कि देश के हर हिस्से में आपको एक से बढ़कर एक ऐतिहासिक स्थल, प्राचीन किले और भव्य महल दिख जाएंगे। इन ऐतिहासिक स्थलों के पीछे प्यार, वीरता, ताकत और युद्ध की प्रसिद्ध कहानियां छिपी है। हम आपको बता रहे हैं देश के प्रमुख ऐतिहासिक स्थल और उनसे जुड़ी कहानियों के बारे में..

नई दिल्ली - भारत की राजधानी

भारत के ऐतिहासिक स्थल

भारत की राजधानी दिल्ली ना केवल भारत की वर्तमान राजधानी है बल्कि दिल्ली ऐतिहासिक नगरों की भी राजधानी है। दिल्ली में इतिहास से जुड़े कई ऐसे पात्र, ऐसे स्थल है जो भारत के साथ-साथ दिल्ली के भी समृद्ध इतिहास को प्रदर्शित करते हैं। भारत की राजधानी में पुरानी और नई दिल्ली का संगम आपको इतिहास के साथ-साथ वर्तमान से भी अवगत कराएगा। पुरानी दिल्ली का क्षेत्र जहां आपको दिल्ली की प्राचीन संस्कृति एवं सभ्यता के साथ-साथ खान-पान का अनुभव कराएगा। वहीं नई दिल्ली का क्षेत्र आपकों भारत और दिल्ली के आधुनिकरण से रुबरु कराएगा। तो चलिए चलते हैं दिल्ली के इस सफर पर।  दिल्ली में आपका सफर सबसे पहले इंडिया गेट से शुरु करते हैं। जो आपको दिल्ली की उन प्राचीन इमारतों का उदारहरण पेश करेगा जिसमें एक विस्तृत इतिहास छुपा बैठा है। इंडिया गेट आधुनिक भारत की वो विरासत है जो आपकों उन शहीदों की शहादत की याद दिलाएगी जो विश्व युद्ध के समय शहीद हो गए थे। इंडिया गेट की दीवारों पर विश्व युद्ध एवं अफगान युद्ध के समय शहीद हुए शहीदों के नाम लिखे दिखेंगे।

इसके साथ ही दिल्ली में आपको संसद भवन, राष्ट्रपति भवन (जो यूरोपीय, मुगल और भारतीय शैली से निर्मित है) देखने को मिलेगा। 15वीं और 16वीं शताब्दी के स्मारकों के साथ कनॉट प्लेस और लोदी गार्डन से आपको प्यार हो जाएगा।

इसके अलावा दिल्ली में आपको मुस्लिम एवं मुगल शासकों के साम्राज्य के प्रतिक ऐतिहासिक स्थल देखने को मिलगें। कुतुब मीनार को उत्तर भारत में पहले मुस्लिम साम्राज्य के स्थल के रूप में जाना जाता है और यह उस जमाने की मुस्लिम वास्तुकला का बेहतरीन उदाहरण है जिसका निर्माण सैंडस्टोन यानी बलुआ पत्थर से किया गया था। इस मीनार में कुरान से ली गई कई आयतें भी उकेरी गई हैं जो मुख्य रूप से अरबी भाषा में है। भारत के पहले मुस्लिम शासक कुतुबुद्दीन ऐबक के नाम पर इस मीनार का नाम कुतुब मीनार पड़ा। वहीं दूसरी ओर
जब मुगल शासक शाहजहां ने अपनी राजधानी आगरा से दिल्ली स्थापित की तब उन्होंने लाल किले का निर्माण करवाया जिसे बनने में करीब 10 साल का वक्त लगा। 1638 से 1648 के बीच लाल किले का निर्माण हुआ और उस वक्त उसका नाम किला-ए-मुबारक था। भारतीय और ईरानी वास्तुकला का बेहतरीन संकलन दिखता है हुमांयू के मकबरे में जो भारत के प्रसिद्ध ऐतिहासिक स्थलों में से एक है। हुमांयू की बीवी हमीदा बानू बेगम ने 15वीं शताब्दी में अपने पति के लिए इस मकबरे का निर्माण करवाया था। इस जगह की सबसे खास बात यह है कि यहां आपको हुमांयू के मकबरे के अलावा बेहद खूबसूरत गार्डन भी देखने को मिलेगा।

यही नहीं दिल्ली में आपको खरीदारी और खान पान के लिहाज़ से भी काफी कुछ देखने और खाने को मिलेगा जिसमें सर्वप्रमुख पुरानी दिल्ली स्थित चांदनी चौक है जो ना केवल खरीदारी के लिहाज से दिल्ली की सबसे बड़ी मार्किट है बल्कि यहां खान-पान के भी एक से बढ़कर एक मुंह में पानी लाने वाले व्यजंन आपकों मिलेंगे। जंतर मंतर, निजामुद्दीन दरगाह, सफदरजंग का मकबरा, तुगलकाबाद का किला एवं पुराना किला इत्यादि दिल्ली के कई ऐतिहासिक स्थल है जो आपकों प्राचीन भारत के समृद्ध इतिहास से रुबरु कराएगें।

धार्मिक स्थल

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दिल्ली मे केवल ऐतिहासिक स्थल ही नहीं बल्कि धार्मिक दृष्टि से भी बहुत कुछ खास है। यहां कई धार्मिक स्थल है जो प्राचीन भारत और दिल्ली का प्रमाण प्रस्तुत करते हैं। कुछ प्राचीन धार्मिक स्थान ऐसे है जिनके लिए आपको अवश्य समय निकालना होगा। इनमें वाइसराय चर्च, जिसे कैथेड्रल चर्च ऑफ रिडेम्प्शन कहते हैं, गुरुद्वारा बंगला साहेब, जामा मस्जिद, सेंट जेम्स चर्च (भारत के सबसे पुराने चर्चों में से एक), कालकाजी मंदिर, कमल मंदिर इत्यादि कई ऐसे प्रमुख ऐतिहासिक स्थल हैं जो आपको शांति प्रदान करेंगें।

दिल्ली में ना केवल आपकों इतिहास से जुड़े त्तव मिलेगें बल्कि आधुनिकता का एक प्रचम लहराता दिखेगा। दिल्ली के आधुनिक रुप को प्रदर्शित करते कई बड़े मॉल और मेट्रो है जो आपकों एक अलग ही अनुभव प्रदान करेंगें। दिल्ली में एक ओर, आप लाल किले और पुरानी दिल्ली के चांदनी चौक बाजार में इतिहास का अनुभव कर सकते हैं, जबकि दूसरी तरफ, आपके पास मॉल और मेट्रो रेल जैसी आधुनिक उपलब्धियां का अनुभव करने का एहसास होगा। दिल्ली की हर जगह आपकों एक नया आनंददायक अनुभव कराएगी।


महाराष्ट्र का औरंगाबाद

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महाराष्ट्र का ऐतिहासिक शहर औरंगाबाद अपने आप में ख़ास है। औरंगाबाद शहर आपको अजंता और एलोरा जैसी प्राचीन गुफाओं का दौरा करा आजीवन आनंद का अनुभव देगा। औरंगाबाद आपकों 2000 साल पहले की प्राचीनतम संस्कृति और सभ्यता से रुबरु कराएगा। यहां की 2 हजार साल पुरानी इमारते जो एएसआई (भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण) की देखभाल में आती है आपकों एक अलग ही दुनिया में ले जाएगीं। प्राचीन में औरंगाबाद शहर फतेहपुर के नाम से जाना जाता था क्योंकि इस शहर का नाम मलिक अम्बर के बेटे फतेहखान ने रखा था। जब इस शहर पर औरंगज़ेब ने विजय पाई तो इसका नाम औरंगाबाद रख दिया। इस शहर का इतिहास बड़ा ही दिलचस्प है। अगर इस शहर के इतिहास के बारे में आप जानना चाहते हैं तो यहाँ ज़रूर आएं। पहाड़ियों से घिरे औंगाबाद शहर का अपना अलग ही ऐतिहासिक महत्व है क्योंकि जितनी खूबसूरत यहाँ की इमारतें हैं उतना ही दिलचस्प इसका इतिहास है। तो चलिए आपको औरंगाबाद महाराष्ट्र की सैर कराते हैं।

अजंता

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सदियो तक अंधकार की गर्त में छिपी रही ये अनूठी गुफाएं औरंगाबाद से 99 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इन गुफाओ की खोज का श्रेय ब्रिटिश फौजी अफसर जॉन स्मिथ को जाता है जिसने इनकी खोज सन् 1819 में की थी। पर्वतो को तराशकर बनाई गई इन 30 गुफाओ में भित्तिचित्र और कलात्मक मूर्तिया पर्यटको को मंत्र मुग्ध कर देती हैं। कहा जाता है कि इन गुफाओ का निर्माण दूसरी शताब्दी में किया गया था। अजंता की गुफाएं दो प्रकार की है। एक चैत्य और दूसरी स्तूप। गुप्तकाल में गुफा की दीवारो पर की गई चित्रकारी भारतीय चित्रकला की गौरवशाली पूंजी है। यहा पर अधिकांश चित्र बौद्ध धर्म से संबंधित है। अजंता गुफाओ के बौद्ध धर्म से संबंधित होने के कारण जापान सरकार ने अनुदान देकर औरंगाबाद से अजंता तक बढ़िया सड़क का निर्माण करवाया है जिस पर खाने-पीने के लिए उत्तम रेस्टोरेंट और ढाबों की उत्तम व्यवस्था है। पर्यटको के लिए ये गुफाएं सुबह 9 बजे से शाम साढ़े पांच बजे तक खुली रहती है।

एलोरा की गुफाएं

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एलोरा की गुफाएं औरंगाबाद से 30 किलोमीटर की दूरी पर है। ये गुफाएं अपने भव्य शिल्प व स्थापत्य कला के कारण विश्व भर में प्रसिद्ध है। यहा की गुफाएं बौद्ध, जैन धर्म की संस्कृतियो के दर्शन मूर्तिकला के माध्यम से कराती है। चट्टानो को काटकर बनाई गई ये गुफाएं संख्या में 34 है जिनमे 16 हिंदू, 13 बौद्ध, तथा 5 जैन धर्म की है। अजंता की गुफाएं जहां कलात्मक भित्तियों के लिए प्रसिद्ध है वही एलोरा की गुफाएं मूर्तिकला के लिए विख्यात है। पहाड़ियों पर घिरी एलोरा गुफाएं, अपनी वास्तुकला, मठों और बौद्ध मंदिरों के लिए लोकप्रिय हैं। इन 'हॉल ऑफ पूजा' का निर्माण 5 वीं शताब्दी ईस्वी में किया गया था। हिंदू धर्म, बौद्ध धर्म और जैन धर्म का एकीकरण यहां आपको देखने को मिलेगा। एलोरा गुफाओं में कैलासा मंदिर द्रविड़ कला का एक अच्छा उदाहरण है। गुफा संख्या 10 में एक मूर्ति है जो बुद्ध को बैठे हुए प्रदर्शित करती है। इसे विश्वकर्मा गुफा के रूप में जाना जाता है।
आप इन प्राचीन स्थलों में महान कलात्मक महिमा को देखेंगे जो इस देश की प्राचीन सभ्यता को जीवंत रूप से प्रदर्शित करती है। क्या आप जानते हैं कि अजंता और एलोरा गुफाओं पर आपकी यात्रा ने आपको वास्तव में दुनिया की सबसे बड़ी मोनोलिथिक संरचना भी दिखा दी है!
 
समय: सूर्योदय से सूर्यास्त तक खुला रहता है
सोमवार को एलोरा गुफाएं बंद रहती हैं।
प्रवेश शुल्क: भारतीयों के लिए 10 रुपय और विदेशियों के लिए 250 भारतीय रुपय है। 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चे मुफ्त में प्रवेश कर सकते हैं।

औरंगाबाद से अजंता की गुफाएं 99 किमी दूर हैं। जबकि एलोरा गुफाएं केवल 30 किमी की दूरी पर हैं। पुणे से यह स्थल 250 किमी की दूरी पर हैं। यहां आप जलगां से भी पहुंच सकते हैं जो केवल 59 किमी पर स्थित है। अजंता की गुफाओं में जाना का सबसे सही समय नवंबर-मार्च के बीच का होता है यानी सर्दी के मौसम या मानसून के मौसम में घूमने वालों के लिए यहां बहुत कुछ देखनो को मिल सकती है। पानी और हरियाली के बीच यह जगह आपको एक यादगार अनुभव कराएगी।

निकटतम रेलवे स्टेशन: जलगांव रेलवे स्टेशन
निकटतम हवाई अड्डा: औरंगाबाद हवाई अड्डा

मुंबई

भारत के ऐतिहासिक स्थल

सपनों की नगरी मुंबई जितनी अपने बॉलीवुड की रगींन दुनिया, सिनेमा, चलचित्रों के लिए जानी जाती है उतनी ही अपने ऐतिहासिक स्थलों के लिए भी मशहूर है। आप मुंबई में 'फिल्म सिटी'  जैसे स्थान पर जा सकते हैं जहां आपकों कई फिल्मों के सेट, लाइट, कैमरा, एक्शन से भरपुर प्रोडक्शन हाउस देखनें को मिलेंगें। मुंबई पूर्वी न्यूयॉर्क के नाम से भी विख्यात है। मुंबई में चौपाटी, गेटवे ऑफ़ इन्डिया प्रिन्स वेल्स म्युज़ियम, एलिफेंटा की गुफाएँ और मडआईलेन्ड बहुत ही प्रसिद्ध है। जो आपकों समुद्र के किनारे ठंडी हवाओं के साथ बहतरीन दृश्य से अवगत कराएगें। फ्लोरा फव्वारा मुंबई की गवर्नर सर बार्टले फ्रीरे को बॉम्बे में अपनी सेवा के लिए श्रद्धांजलि के रूप में समर्पित एक और सुंदर स्थल है। मुंबई उच्च न्यायालय जो भारत के सबसे प्राचीन उच्च न्यायालयों में से एक है वो भी आप देख सकते हैं।

इसके अलावा कनहेरी गुफाएं, , राजबाई क्लॉक टॉवर, यूनिवर्सिटी बिल्डिंग, वर्ली किला, बलोडियन बागान, फांसी बाग, जिजामाता उद्यान चिड़ियाघर, कमला नेहरू पार्क इत्यादि भी दिलचस्प जगहें हैं जिन पर आप जा सकते हैं और उनका आनंद उठा सकते हैं।

मुंबई के प्रातीनतम धार्मिक स्थानों में हाजी अली दरगाह, बाबुलनाथ मंदिर, माउंट मैरी चर्च, सिद्धिविनायक मंदिर और वालुकेश्वर मंदिर हैं इत्यादि प्रमुख है जो आपको एक अपार शांति का अनुभव कराएगी



झारखंड का जमशेदपुर

जमशेदपुर झारखंड राज्य का एक पुराना शहर है जो इस्पात संयंत्र के अस्तित्व के कारण 'स्टील सिटी' के रूप में लोकप्रिय है, जिसने यहां बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार प्रदान किया है। लौहनगरी के रूप में विख्यागत जमशेदपुर केवल झारखंड में नहीं, बल्कि पूरे विश्वझ पटल पर चर्चित है। इसे टाटानगर के भी नाम से जाना जाता है हालांकि, जमशेदपुर में कुछ वास्तव में पुरानी इमारतें अभी भी अपने गौरवशाली अतीत की पुरानी कहानियों को बताती हैं। लोग पूरे विश्वअ से इस लौहनगरी को देखने आते हैं। टिस्को , टेल्को  जैसे अंतर्राष्टी य स्तपर के कारखाने के अलावा, जुबली पार्क, दालम पहाड़ी, हुडको लेक, मोदी पार्क, कीनन स्टेरडियम जेआरडी टाटा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, दीमा झील, टाटा स्टील जूलॉजिकल पार्क और जुबली पार्क है आदि ऐसे जगह है जो यात्रा के लिए दिलचस्प हैं। पर्यटन की दृष्टि से टाटानगर का महत्वह अंतराष्ट्री य स्‍तर पर भी है। इसे हाल में ही इंटरनेशनल क्लीटन सिटी के अवार्ड से नवाजा गया है। जहाँ पर्यटक घूम सकते हैं।

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मंदिर

जमशेदपुर के सबसे पुराने मंदिरों में काल्मा में कालीबाड़ी मंदिर और टेल्को में भुवनेश्वरी मंदिर शामिल है। सर दोराबजी टाटा पार्क, दल्मा वन्यजीव अभयारण्य और नदी की बैठक कुछ शांतिपूर्ण चिन्ह हैं जो आपको फिर से प्राचीन समय मे ले जाकर जीवंत कर देगें।

आप जमशेदपुर के उत्कृष्टता केंद्र भी जा सकते हैं और इसमें व्यापक इस्पात कारखाने के निर्माण के पीछे इतिहास के बारे में जान सकते हैं। जमशेदपुर जैसे पुराने शहर, जिसे पहले 'सकची' के नाम से जाना जाता था, न केवल भारत में घरेलू इस्पात आवश्यकताओं को पूरा करता है बल्कि दुनिया भर के देशों को बेहतर गुणवत्ता वाले स्टील का निर्यात भी करता है। यह एक आधुनिक शहर है जिसें सबसे आधुनिक दृष्टिकोण प्राप्त है। 


हैदराबाद और तेलंगाना के स्थल

भारत के ऐतिहासिक स्थल

भारत का दक्षिण राज्य हैदराबाद इट पार्क, मशहूर बाजार, महलों, किलों और संग्रहालयों के साथ एक बढ़ते शहर के साथ एक हलचल वाला शहर है। जो अपने जुड़वां शहर सिकंदराबाद के साथ विशाल आधारभूत विकास का साक्षी है। इस प्राचीन शहर की यात्रा आपको पौराणिक स्थलों के साथ-साथ बेहतरीन व्यंजनों का आनंद लेने का अवसर देगी। हैदराबाद की लोकप्रिय हैदराबादी बिरयानी और हलीम! यहां के प्रमुख व्यंजनों में से एक है जो आपके मुंह में पानी लाने का दम रखते हैं। यदि आप हैदराबाद जाएं तो हैदराबाद के व्यंजनों का जरुर लुत्फ उठाएं।

खैर, नवाबों की संस्कृति को इस शहर के दौरे में सबसे अच्छा समझा जा सकता है। हैदराबाद, वर्तमान आंध्र प्रदेश और तेलेंगाना की संयुक्त राजधानी है। इस बेपनाह सुन्दर शहर की स्थापना कुतुब शाही वंश के शासक मोहम्मद कुली कुतुब शाही ने 1591 में की थी।

यहां आपको मक्का मस्जिद को देखना अच्छा लगेगा, जिसे 400 साल पहले बनाया गया था, चारमीनार के चारों ओर आकर्षक शहर, गुलकोंडा किला और कुतुब शाही कबूतर कुतुब शाही राजवंश शासकों के शासकों को समर्पित है। इसके साथ ही मुख्य आकर्षण चारमीनार, हुसैन सागर झील, बिड़ला मंदिर, सालारजंग संग्रहालय आदि है जो इस शहर को अलग पहचान देते हैं।


भारत के ऐतिहासिक स्थल

हैदराबाद में इतिहास के संदर्भ में खोजने के लिए बहुत कुछ है। आपको चंद्रयानगुट्टा में स्थित पेगाह कब्रों का दौरा करने के लिए समय अवश्य निकालना चाहिए, इतालवी संगमरमर का उपयोग करके फलकनुमा पैलेस बनाया गया था। पैगाह मकबरा का संबंध पैगाह के शाही परिवार से है, जिसे हैदराबाद में शम्स उल उमराही परिवार के नाम से भी जाना जाता है। चूने व गारे से बने ये मकबरे प्राचीन काल बखूबी तरीके से याद दिलाते हैं। हैदराबाद के पीसाल बंदा में मौजूद इस मकबरे को मकबरा शम्स उल उमरा के नाम से भी जाना जाता है। किले के पास में यह मकबरे जैसे बल्ब के आकर और गोलकार में नज़र आते हैं। यहाँ कुतुबशाही वंश के शासकों के मकबरे हैं।

इसके साथ ही चोमहला पैलेस परिसर चारमीनार के पास स्थित, इस परिसर में चार महल शामिल है जो मुगल और यूरोपीय शैलियों में निर्मित है और जहाँ हैदराबाद के निजाम और शाही शासकों की तस्वीरें और अन्य यादगार चीज़े हैं। जो असफ जाही राजवंश की गद्दी के रूप में कार्य करता था सरमान द्वारा निर्मित असमान गढ़ पैलेस 1885 में असमान जहां (हैदराबाद के प्रधान मंत्री) और गोथिक वास्तुकला पर आधारित है।। नेहरू चिड़ियाघर देश का ही नहीं बल्कि पूरे एशिया का सबसे बड़े चिड़ियाघरों में से एक है। यहाँ आप लॉयन सफारी तथा सफेद शेर को देख लुफ्त उठा सकते हैं। गोलकुंडा कभी हीरों की खानों के लिए विश्व-भर में प्रसिद्ध था। 11 किलोमीटर के एरिया में फैले इस किले की मज़बूत ग्रेनाइट दीवार जो किले को चारों ओर से घेरे हुए है इसमें आठ प्रवेश द्वार हैं। इस किले की खासियत यह है कि यहाँ के मुख्य प्रवेश द्वार पर गुम्बद के नीचे खड़े होकर ताली बजाने से उसकी आवाज़ को किले के सबसे ऊपरी हिस्से तक सुना जा सकता है।

महल

हैदराबाद में इसके साथ ही पुरानी हवेली, किंग कोठी पैलेस, बेला विस्टा, गांधीपेट झील के पास तारामती बारादारी महल, हिमायत सागर, मीर आलम टैंक ऐतिहासिक महत्व वाले अन्य स्थान हैं। जो आपकी यात्रा को बहुत यादगार बनाएगे। धार्मिक स्थानों में, आप मक्का मस्जिद चारमीनार के पास स्थित है वहां जा सकते हैं।  जामा मस्जिद भी बेहतरीन कला की एक मिसाल है। यह हैदराबाद की प्राचीन मस्जिदों में से एक है  साथ ही  हेब्रोन हाउस ऑफ पूजा, आनंद बुद्ध विहार और लक्ष्मीनरसिम्हा स्वामी मंदिर जैसे स्थानों पर जाकर शांति प्राप्त कर सकते हैं

हैदराबाद की यात्रा में आपको मनोरंजन एवं लज़ीज व्यंजनों के साथ  बहुत प्राचीन इमारतों की सुंदर वास्तुकला और हां, कुछ जीवंत सफेद मोती और लाखों चूड़ियों की छनछनाहट का आनंद मिल सकता है। यहां की यादें जीवन भर आपके साथ बनी रहेंगी।
 
कैसे कब जाएं हैदराबाद
हैदराबाद जाना हो तो ठंड के समय में जाए क्योंकि न ही यहां ज्यादा ठंड पड़ती है और न ही ज्यादा गर्मी, इसलिए यह मौसम हैदराबाद घूमने के लिए सबसे अच्छा माना जाता है।

निकटतम हवाई अड्डाः राजीव गांधी टर्मिनल और एनटी रामा राव टर्मिनल

निकटतम रेलवे स्टेशनः सिकंदराबाद



राजस्थान का उदयपुर


भारत के ऐतिहासिक स्थल

सिटी पैलेस

भारत के पश्चिमी राज्य राजस्थान में स्थित उदयपुर एक खूबसूरत शहर है जिसे 'द सिटी ऑफ़ लेक्स'  यानि झीलों का शहर और 'वेनिस ऑफ द ईस्ट' भी कहा जाता है। झीलों के साथ मरुभूमि का अनोखा संगम अन्यत्र कहीं नहीं देखने को मिलता है। यह शहर अरावली पहाड़ी के पास राजस्थान में स्थित है। उदयपुर को हाल ही में विश्व का सबसे खूबसूरत शहर घोषित किया गया है। इस शहर में एक समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि है - यहां राजपूतों के शासन के दौरान मौजूद वास्तुकला और भव्यता का अद्भुद नजारा आपकों देखनें को मिलता है। आपको पिचोला झील के तट पर सिटी पैलेस का दौरा जरुर करना चाहिए। यह 1559 में महाराजा उदय मिर्जा सिंह द्वारा बनाया गया था। महल के अंदर सुंदर चित्र, वास्तुकला और प्राचीन वस्तुएं आपको भव्यता से भर देंगी। सिटी पैलेस की स्थापना 16वीं शताब्दी में आरम्भ हुई। परिसर में प्रवेश करते ही आपको भव्य 'त्रिपोलिया गेट' दिखेगा। इसमें सात आर्क हैं। ये आर्क उन सात स्मरणोत्सवों का प्रतीक हैं जब राजा को सोने और चांदी से तौला गया था तथा उनके वजन के बराबर सोना-चांदी को गरीबों में बांट दिया गया था। इसके सामने की दीवार 'अगद' कहलाती है। यहां पर हाथियों की लड़ाई का खेल होता था। इस परिसर में एक जगदीश मंदिर भी है। इसी परिसर का एक भाग सिटी पैलेस संग्रहालय है।

इसके साथ ही 18 वीं शताब्दी में मेवार के रॉयल कोर्ट के मुख्यमंत्री द्वारा बागोर-की-हवेली का निर्माण किया गया है। यह बागोर के महाराणा शक्ति सिंह का निवास स्थान भी था और इसलिए इसे 'बागोर-की-हवेली' कहा जाता है। 15 वीं शताब्दी किला - कुंभलगढ़ किला है जो मेवाड़ के राजा महाराणा प्रताप का जन्म स्थान है। झील पिचोला 1362 ईस्वी में बनाया गया था और बाद में 16 वीं शताब्दी में राणा उदय सिंह द्वितीय द्वारा विस्तारित किया गया था। राजस्थान के उदयपुर में राजाओं द्वारी बनवाए गए अदुभुद किलों और महलों का संगम स्थित है।

सज्जन गढ़ महल

भारत के ऐतिहासिक स्थल

सज्जन गढ़ या मॉनसून पैलेस एक जगह है जहां से आप जादुई सूर्यास्त देख सकते हैं। सज्जनगढ पैलेस को पैलेस ऑफ मॉनसून के नाम से भी जाना जाता है। यह पैलेस शहर के पश्चिम में एक ऊंची पहाडी पर स्थित है। यह स्थान समुद्र तल से 3100 फुट ऊंचाई पर है। इस पैलेस का निर्माण 18वी सदी में हुआ था। यहां से उदयपुर शहर का नज़ारा बेहद खूबसूरत दिखाई पडता है। महल 1884 में महाराणा सज्जन सिंह द्वारा बनाया गया था जो यहां एक वेधशाला बनाना चाहते थे। उदयपुर निश्चित रूप से महलों का एक स्थान है! यहां हल्दीघाटी संग्रहालय भी है। हल्दीघाटी इतिहास में महाराणा प्रताप और अकबर के बीच हुए युद्ध के लिए प्रसिद्ध है। यह युद्ध 18 जून 1576 ई. को हुआ था। इस युद्ध में महाराणा प्रताप की हार हुई थी। इसी युद्ध में महाराणा प्रताप का प्रसिद्ध घोड़ा चेतक मारा गया था।  इसके साथ ही उदयपुर में फतेह सिगर झील, जगदीश मंदिर, एवं कर्णी माता का मंदिर प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है जहां आपकों जानवरों और मनुष्य के बीच प्रेम का एक अद्भुद नजारा देखने को मिलेगा।

कैसे पहुंचे उदयपुर

आप यहां किसी भी मौसम में आ सकते हैं। यह शहर हर मौसम में आपका स्वागत करने के लिए तैयार है।
निकटतम हवाई अड्डाः उदयपुर हवाई अड्डा
निकटतम रेलवे स्टेशनः उदयपुर सिटी रेलवे स्टेशन


सिक्किम का रबडेनत्से

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भारत का उत्तरी पूर्वी राज्य सिक्किम सात बहनों के नाम से मश्हूर पूर्वोत्तर भारत के राज्यों में से एक है। सिक्किम एक बेहद ही खूबसूरत राज्य है। यह खूबसूरत राज्य अपने पहाड़, वादियां, घाटियां ,नेशनल पार्क और कलकल कर बहने वाली नदियों के लिए जाना जाता है। इस खूबसूरत राज्य में कुछ बेहद ही खूबसूरत हिलस्टेशन मौजूद है।
पश्चिम सिक्किम जिले में स्थित रब्डेन्से, खंडहरों के लिए राजशाही गाथा है। रबडेनत्से सिक्किम की दूसरी राजधानी था और पहली युकसोम थी। रबडेनत्से अवशेष बौद्ध धार्मिक यात्रा का एक भाग है जो कई मठों से मिलकर बना है जिसका प्रारंभ युकसोम से होता है जहाँ दुबडी मठ है। 1670 से 1814 तक रबडेनत्से सिक्किम की दूसरी राजधानी थी लेकिन हमलों के कारण खंडहर में बदल गईं। सिक्किम की राजधानी शहर पर गुरखा सेना ने हमला किया और पूरी तरह से नष्ट कर दिया था। हालांकि, यह इस स्मारक विरासत के रुप मे सैकड़ों पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है। लेकिन इसके बाद भी सिक्किम की सुंदरता पर्यटको का मन मोह लेती है। आप सिक्किम के सबसे पुराने मठों में से कि पेमयांग्स मठ देख सकते हैं।

यह एक ऐसा स्थान है जहां आपको सिक्किम के इतिहास को समझने के लिए जाना चाहिए यहां आपकों सिक्किम की संस्कृति उसका इतिहास जानने का मौका मिलेगा। रबडेनत्से के अवशेषों को दो खण्डों में बाँटा गया है – उत्तरी खंड और दक्षिणी खंड। उत्तरी खंड वह है जहाँ राजसी परिवार रहता था। यहाँ एक खुला चतुष्कोण है जहाँ “दाब ल्हगांग” के अवशेष हैं, वह स्थान जहाँ राजसी परिवार प्रार्थना करता था। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण इसका संरक्षण करता है और इसे राष्ट्रीय महत्व का स्मारक भी माना गया है। यही वह जगह है जहां 'दाब ल्हागांग' देखा जा सकता है जहां शाही परिवार ने प्रार्थना की थी।

दक्षिणी विंग वह स्थान था जहां राजा पत्थर के सिंहासन पर बैठते थे और आम लोगों की दिक्कतों को सुना करते थे। आप पेमायांग्स मठ से रब्डेन्से तक पहुंच सकते हैं यह सिर्फ 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इतना ही नहीं यहां आपको एनके गुफा मिलेगी जहां पर देवी देवताओं की सुंदर व भव्य मूर्तियां, पुस्तकालय तथा उनसे संबंधित मुखौटे आदि देखने को मिलते हैं। निकट ही स्थित डियर पार्क पर भगवान बुद्ध की प्रतिमा भी देखी जा सकती है। जो दर्शनार्थी सिक्किम शैली में रचे-बसे वस्त्र व लकड़ी का सामान खरीदने की इच्छुक है, उनके लिए यह बहुत अच्छी जगह हैं। यह स्तूप तिब्बतियों का तीर्थस्थल है।


बिहार का नालंदा

भारत के ऐतिहासिक स्थल

भारत का पूर्वी राज्य बिहार पर्यटन की दृष्टि से ऐसे राज्यों में शुमार है जो आध्यात्मिकता और इतिहास का संगम है। बौद्ध, जैन और सिख धर्मावलंबियों के लिए पूरी दुनिया में जो जगह सबसे पवित्र मानी गए हैं उनमें बिहार का प्रमुख स्थान है। इन तीनों धर्मों के प्रमुख लोगों का संबंध बिहार से रहा है। फिल्म 'जॉनी मेरा नाम का प्रसिद्ध गीत ‘ओ मेरे राजा’ तो आपको याद ही होगा। जी हां इस गीत को भारत के सबसे प्राचीनतम राज्य बिहार के शहर नालंदा में फिल्माया गया था। नालंदा भारत में प्राचीनतम स्थलों में से एक है। नालंदा जो प्राचीन मगध (आधुनिक बिहार) में स्थित है यहां एक बड़ा बौद्ध मठ है जो बौद्ध धर्म के उदय का प्रतीक है। नालंदा विश्विद्यालय दुनिया के सबसे प्राचीनतम शिक्षण संस्थानों में से एक है जहां बौद्ध धर्म की शिक्षाएं दी जाती है। यहां असल में, चीन, मध्य एशिया, तिब्बत, कोरिया आदि से विद्वान यहां शिक्षा ग्रहण करने आते हैं यह जगह उन्हें अपनी और आकर्षित करती है। यह भारतीयों के लिए गर्व की बात है। बिहार के नालंदा का इतिहास विश्व प्रसिद्ध है। यहां पांचवी शदी में स्थापित विश्वविद्यालय पूरी दुनिया के लिए ज्ञान का केंद्र था। विवि के खंडहर को यूनेस्को ने विश्व विरासत सूची में शामिल किया है। यहां आने वाले देशी-विदेशी पर्यटक प्राचीन भारत के एक गौरवशाली इतिहास से रूबरू होते हैं। माना जाता है कि इस विश्व विद्यालय की स्थासपना 450 ई॰ में गुप्त शासक कुमारगुप्तं ने की थी। इस विश्व्विद्यालय को इसके बाद आने वाले सभी शासक वंशों का सर्मथन मिला। महान शासक हर्षवर्द्धन ने भी इस विश्वाविद्यालय को दान दिया था। हर्षवर्द्धन के बाद पाल शासकों का भी इसे संरक्षण मिला। केवल यहाँ के स्‍थानीय शासक वंशों ने ही नहीं वरण विदेशी शासकों से भी इसे दान मिला। इस विश्वाविद्यालय का अस्तित्वर 12वीं शताब्दीआ तक बना रहा। 12वीं शताब्दीी में तुर्क आक्रमणकारी बख्तियार खिलजी ने इस विश्वाविद्यालय को जल‍ डाला था। विश्वविद्यालय के पास ही यहां एक पुरातात्विक संग्रहालय भी मौजूद है, जहां खुदाई से प्राप्त उस समय के अवशेषों को संभाल कर रखा गया है। यहां बुद्ध की विभिन्न मूर्तियों को साथ पुराने सिक्के, अभिलेख, तांबे से बने प्लेट-बर्तनों को रखा गया है। यह भारत का पहला ऐसा शिक्षण संस्थान था जहां पाली साहित्य व बौद्ध धर्म की पढ़ाई के साथ, शोध को भी महत्व दिया गया। कहा जाता है यहां मौजूद पुस्तकालय में इतनी किताबें रखी गईं थी, कि जब खिलजी ने इसे जलाया तो इन किताबों की आग कई दिनों तक सुलगती रही।

हालांकि, नालंदा स्थित इस संस्थान को नावा नालंदा महाविहार की स्थापना के साथ पुनर्जीवित किया गया था जो पाली और बौद्ध धर्म सीखने वालों का केंद्र है। नालंदा विश्विद्यालय 2006 में एक डीम्ड विश्वविद्यालय बन गया। सितंबर 2014 में, आधुनिक नालंदा विश्वविद्यालय का पहला शैक्षिक वर्ष शुरू हुआ। पर्यटक नालंदा जाते हैं क्योंकि यह भी एक महत्वपूर्ण बौद्ध स्थल है। नालंदा में पुरातत्व संग्रहालय में दुर्लभ और प्राचीन कलाकृतियों शामिल हैं।

नालंदा जिले में ही राजगीरी भी स्थित है जो देशी-विदेशी सैलानियों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। बिहार आने वाले पर्यटक राजगीर जाना नहीं भूलते। राजगीर कभी शक्तिशाली मगध साम्राज्य की राजधानी थी। महाभारत काल में यह जरासंध की नगरी थी। यह सभी धर्मों के लिए आदरणीय स्थान है। पटना शहर से लगभग 106 किमी की दूरी पर, पहाड़ियों से घिरा राजगीर एक धार्मिक स्थल के साथ साथ एक खूबसूरत हेल्थ रिसॉर्ट भी है। आप यहां हिंदू धर्म के साथ-साथ बौद्ध-जैन धर्मों के जुड़े तीर्थ स्थलों को भी देख सकते हैं।

भारत के ऐतिहासिक स्थल

इसके अलावा इसके आस-पास में भी भ्रमण (घूमने) के लिए बहुत से पर्यटक स्थेल है। राजगीर, पावापुरी, गया तथा बोध-गया यहां के नजदीकी पर्यटन स्थाल हैं। प्रसिद्ध चीनी यात्री ह्वेनसांग ने 7वीं शताब्दी में यहाँ जीवन का महत्त्वपूर्ण एक वर्ष एक विद्यार्थी और एक शिक्षक के रूप में व्यतीत किया था। भगवान बुद्ध ने सम्राट अशोक को यहाँ उपदेश दिया था। भगवान महावीर भी यहीं रहे थे। प्रसिद्ध बौद्ध सारिपुत्र का जन्म यहीं पर हुआ था।

नालंदा में एक और जगह आपको एक जगह और जाना चाहिए, जो जुआनजैंग मेमोरियल हॉल प्रसिद्ध बौद्ध भिक्षु और यात्री का सम्मान करने के लिए बनाया गया है। यदि आप नालंदा के इतिहास के बारे में जानना चाहते हैं, तो आपको नालंदा मल्टीमीडिया संग्रहालय में 3-डी एनीमेशन और मल्टीमीडिया प्रस्तुतियों के माध्यम से देखने का अवसर मिलेगा जो आपको बिहार के साथ-साथ भारत के प्राचीन इतिहास से परिचिच कराएगा।

यही नहीं नालंदा के पास स्थित बौद्ध गया का बहुत धार्मिक महत्व है इसी पावन स्थल पर गौतम बुद्ध ने लंबा समय बिताकर ज्ञान की प्राप्ति की। बोध गया के ऐतिहासिक व धार्मिक महत्व को देखते हुए यूनेस्को ने 2002 में इस स्थल विश्व धरोहर घोषित किया। हां भगावन बुद्ध से जुड़े कई साक्ष्य मौजूद हैं, जिनके दर्शन कर आप बिहार के गौरवाशाली अतीत को आसानी से समझ सकते हैं।

कैसे पहुंचे नालंदा

निकटतम हवाई अड्डाः  जयप्रकाश नारायण हवाई अड्डा (पटना) में है। जो 89 किलोमीटर दूर है।
निकटतम रेलवे स्टेशनः नालन्दाा रेलवे स्टेकशन है।


कर्नाटक में हम्पी

भारत के ऐतिहासिक स्थल

भारत का दक्षिण राज्य कर्नाटक का हम्पी शहर अपने विस्तृत इतिहास के लिए प्रसिद्ध है। हम्पी का मतलब चैंपियन होता है! हम्पी एक गांव है जो विजयनगर शहर के खंडहरों के बीच स्थित है जो विजयनगर साम्राज्य की राजधानी थी। कहा जाता है कि विजयनगर साम्राज्य में एक विशाल सेना लगभग 1500 ईस्वी में 500,000 से अधिक लोग यहां रहते थे। समय, आक्रमण और बड़े पैमाने पर विनाश के साथ, यह राजशगी खंडहर में परिवर्तित हो गया। यहां मौजूद बड़े पत्थरों को हिंदू देवताओं की मूर्तियों में बनाया गया है। हम्पी का रणनीतिक स्थान था - तुंगभद्रा नदी आसपास के इलाकों में बहती है और तीनों तरफ बड़ी पहाड़ियों से घिरा हुआ है। हम्पी धर्म के लोग भी विजयनगर में ही रहते थे और उन्होंने अपने साम्राज्य में विरूपाक्ष मंदिर और बहुत से इतिहासिक स्मारकों का निर्माण भी किया था।

बैंगलोर से दूरी: 353 किमी।
बेल्लारी से दूरी: 74 किमी।
होस्पेट से दूरी: 13 किमी।

हालांकि हम्पी में बहुत से प्रसिद्ध हिन्दू मंदिर है जिनमे हमें वेदांत धर्मशास्त्र का प्रभाव भी दिखाई देता है, हम्पी के कुछ मंदिरों में आज भी भगवान की पूजा की जाती है। विरुपक्ष मंदिर (जिसे पंपवती मंदिर भी कहा जाता है) की उपस्थिति के कारण, यह जगह एक महत्वपूर्ण धार्मिक केंद्र है। दो देवी मंदिरों के साथ हेमकुता पहाड़ी पर एक जैन मंदिर है। साथ ही बडवीलिंग हम्पी के सबसे बड़े लिंग का छायाछित्र है। जो लक्ष्मी नरसिम्हा मूर्ति के बाजू में ही स्थित है। यदि ध्यान से हम इस लिंग को देखे तो हमें इसमें तीन आँखे भी दिखायी देती है जिन्हें शिवजी की तीन आँखे भी माना जाता है। हम्पी के आस-पास के अन्य मंदिरों में यंत्रोधारक आंजनेय मंदिर, चंद्रमौलेश्वर मंदिर और मलावंत रघुनाथस्वामी मंदिर (मंदिर की दीवारों पर मछली और समुद्री रूपों के साथ) शामिल हैं। मल्यावंता रघुनाथास्वमी मंदिर प्राचीन भारतीय शैली की वास्तुकला में बनाया गया है। मल्यावंता रघुनाथास्वमी मंदिर जमीन से 3 किलोमीटर निचे बना हुआ है। इसकी अंदरूनी दीवारों पर अजीब दिखावा किया गया है और मछली और समुद्री जीवो की कलाकृतियाँ भी बनायी गयी है। हजारा राम मंदिर यह एक खंडहर मंदिर है जिसे हिन्दू धर्मशास्त्र में काफी महत्त्व दिया गया है। यह मंदिर 1000 से भी ज्यादा लकडियो की खुदाई और शिलालेख और रामायण की प्राचीन कथा के लिये जाना जाता है। परिसर मंदिर दीवारों पर नक्काशी और शिलालेखों के माध्यम से रामायण की कहानी के चित्रण के लिए लोकप्रिय है।

भारत के ऐतिहासिक स्थल

ऐतिहासिक मंदिरों की सैर के साथ-साथ आप यहां पवित्र जलाशयों की सैर का भी प्लान बना सकते है। हम्पी के पास कोप्पल जिले स्थित पम्पा सरोवर हिन्दूओं का पवित्र स्थान/तीर्थस्थान माना जाता है। तुंगभद्रा नदी के दक्षिण में स्थित इस सरोवर का संबंध भारतीय पौराणिक काल से बताया जाता है। हिंदू धर्मशास्त्र में भारत की पांच झीलों को सामूहकि रूप से पवित्र पंच-सरोवर कहा गया है, जिनमें मानसरोवर, बिंदू सरोवर, नारायण सरोवर, पम्पा सरोवर और पुष्कर सरोवर शामिल हैं।

विट्ठल मंदिर एक 16वीं सदी की संरचना है जो भगवान विट्ठल या भगवान विष्णु को समर्पित है। यह हम्पी की सैर करने आए सभी पर्यटकों के लिए एक देखने याग्य स्थल है क्योंकि इसकी खूबसूरती, जटिल नक्काशियां और शानदार वास्तुकला यहां स्थित किसी भी अन्य संरचना के अनुरूप नहीं है। इस मंदिर में संगीत खंभे हैं। इनमें से दो अंग्रेजों द्वारा खोले गए थे ताकि पता चले कि खोखले खंभे से कितनी आवाज उत्पन्न हुई थी।

भारत के ऐतिहासिक स्थल

तुंगभद्रा नदी के दक्षिणी किनारे पर स्थित यह मंदिर मूल दक्षिण भारतीय द्रविड़ मंदिरों की स्थापत्य शैली का प्रतिनिधित्व करता है। विट्ठल मंदिर का निर्माण राजा देवराय द्वितीय के शासनकाल के दौरान किया गया था और यह मंदिर विजयनगर साम्राज्य द्वारा अपनाई गई शैली का प्रतीक है। पर्यटक मंदिर के अलंकृत स्तंभों और बारीक नक्काशियों से प्रभावित हो जाते हैं। रंगा मंड़प और 56 संगीतमय स्तंभ जिन्हें थपथपाने से संगीत सुनाई देता है, विट्ठल मंदिर की उत्कृष्ट आकृतियां हैं। मूर्तियों को भीतर के गर्भगृह में रखा गया है और यहां केवल मुख्य पुजारी ही प्रवेश कर सकते हैं। छोटा गर्भगृह आम जनता के लिए खुला है जबकि स्मारकीय सजावट बड़े गृह में देखी जा सकती है। इस मंदिर के परिवेश में मौजूद एक पत्थर का रथ इस मंदिर का एक अन्य प्रमुख आकर्षण है। परिसर की पूर्वी दिशा में स्थित, यह रथ वजनदार होने के बावजूद इसके पत्थर के पहियों की मदद से इसे स्थानांतरित किया जा सकता है। मंदिर के परिसर के भीतर कई मंड़प, मंदिर और विशाल कक्ष भी बनाए गए हैं।  यहां अन्य दिलचस्प स्थल लोटस महल, भीम के द्वार, तलारीगट्टा गेट और हाथी के तारों के साथ अंजनाद्री पहाड़ी और सनपुर के पास झील स्थित है। इतिहास और वास्तुकला में रुचि रखने वालों के लिए, यह एक जगह आपको कभी निराश नहीं करेगी। यहां जहां आपको विजयनगर साम्राज्य के खंडहरों के साथ-साथ वास्तुकला का अद्भुद संगम देखने को मिलेगा।

कैसे पहुंचे हम्पी

हम्पी जाने के लिए होस्पेट जाना पड़ता है। हैदराबाद से होस्पेट के लिए रेल है। होस्पेट से आगे 15 किलोमीटर की दूरी पर हम्पी है।

निकटतम हवाईअड्डाः  बेल्लारी हवाई
निकटतम रेलवे स्टेशनः  हुबली रेलवे स्टेशन


उत्तर प्रदेश का अयोध्या

भारत के ऐतिहासिक स्थल

भारत के उत्तर प्रदेश में सरयु नदी के तट पर स्थित अयोध्या भारत का एक प्राचीन शहर है और भगवान राम (भगवान विष्णु के सातवें अवतार) की जन्म भूमि है। इसे उनका जन्म स्थान माना जाता है। यह शहर प्राचीन कौशल साम्राज्य की राजधानी थी। अयोध्या शहर का इतिहास 9,000 साल पुराना मामा जाता है। अयोध्या एक पवित्र शहर है और इसमें कई हिंदू मंदिर शामिल हैं। यह यूपी के फैजाबाद जिले में है। यह शहर 600 ईसा पूर्व में एक महत्वपूर्ण व्यापार केंद्र भी था। इतिहासकारों ने इस स्थान की पहचान 5 वीं शताब्दी ईसा पूर्व के दौरान एक प्रमुख बौद्ध केंद्र साकेत, (यह व्यापक रूप से धारणा है कि बुद्ध ने कई अवसरों पर अयोध्या का दौरा किया) जो यह 5 वीं शताब्दी ईस्वी तक बना रहा।

शास्त्रों में अयोध्या को 'भगवान द्वारा निर्मित शहर' के रूप में वर्णित किया गया है जिसे स्वर्ग के रूप में समृद्ध बनाया गया है। हालांकि, इस शहर की सुंदरता यह है कि यह बौद्ध धर्म, जैन धर्म और हिंदू धर्म सहित इस्लाम जैसे अन्य सभी धर्मों के सार को जोड़ता है। यहां पांच तीर्थंकर पैदा हुए थे। यह शहर भगवान राम के पूर्वजों राजा अयोध से अपना नाम प्राप्त करता है। बुद्ध के समय के दौरान, अयोध्या को सकाता के नाम से जाना जाता था। मौर्य साम्राज्य और गुप्त राजवंश द्वारा स्थापित कई बौद्ध मंदिर, स्मारक और यहां सीखने के केंद्र हैं। कहा जाता है कि वाल्मीकि ने अयोध्या में रामायण लिखना शुरू किया था।

यदि आप आयोध्या जाएं तो आपको अयोध्या में हनुमान गढ़ी जाना चाहिए जो हनुमान मंदिर के साथ एक बड़ा चार तरफा किला है। अयोध्या के बीचोंबीच हनुमानगढ़ी में रामभक्त हनुमानजी का विशाल मंदिर है। मंदिर पहुंचने के लिए आपको कम से कम 76 कदम चढ़ना होगा। एक पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान हनुमान यहां एक गुफा में रहते थे और जनमभूमी या रामकोट (अयोध्या में पूजा की मुख्य जगह) की रक्षा की थी। ऐसी मान्यता है कि अयोध्या में सबसे पहले हनुमानगढ़ी मंदिर में बजरंगबली के दर्शन करके उनका आशीर्वाद लेना चाहिए, फिर अन्य मंदिर जान चाहिए। इसके पीछे 'राम दुआरे तुम रखवारे, होत न आज्ञा बिनु पैसारे।' वाली मान्यता दिखती है। यानी हनुमानजी की कृपा के बिना किसी को रामजी का आशीर्वाद नहीं मिलता है।

कनक भवन एक और मंदिर है जिसे सीता को भगवान राम से शादी के शुभ अवसर पर उनकी मां ने दिया था। अयोध्या का कनक भवन बेहद विशाल व भव्य मंदिर है। राम-जानकी की मूर्ति भी श्रद्धालुओं को मोहित कर देती है। यह स्वर्ग द्वार है यह वह जगह है जहां भगवान राम का संस्कार किया गया था। छोटा देवकाली मंदिर देवी ईशानी या दुर्गा देवी को समर्पित है, जिसे सीता के कुलदेवी माना जाता है।

अन्य शहरों से अयोध्या की दूरी
फैजाबाद: 5 किलोमीटर।
इलाहाबाद: 166 किमी।
लखनऊ: 134 किमी।
वाराणसी: 20 9 किमी।
गोंडा: 51 किमी।

नागेश्वरनाथ का मंदिर भगवान राम के बेटे कुश नाम से बनाया गया था। कहा जाता है कि नागेश्वर नाथ मंदिर को भगवान राम के पुत्र कुश ने बनवाया था। माना जाता है जब कुश सरयू नदी में नहा रहे थें, तो उनका बाजूबंद खो गया था। बाजूबंद एक नाग कन्या को मिला जिसे कुश से प्रेम हो गया। वह शिवभक्त थी। कुश ने उसके लिए यह मंदिर बनवाया था। कहा जाता है कि यही एकमात्र मंदिर है जो विक्रमादित्य के काल में सुरक्षित रहा, जबकि बाकी शहर खंडहर में तब्दील हो चुका था। इसका अर्थ यह हुआ कि यह मंदिर अयोध्या में विक्रमादित्य द्वारा खोजा गया। शिवरात्रि पर्व यहां बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है।

भारत के ऐतिहासिक स्थल

अयोध्या में यूं तो हर जगह अपने आप मे बेहद पवित्र और खास है फिर भी आपको एक जगह अवश्य जाना चाहिए। वो जगह है भगवान श्रीराम के पिता राजा दशरथ का महल। चक्रवर्ती महाराज दशरथ महल को अयोध्या में रामकोट में स्थित बादा स्टेशन बडी जगह के नाम से भी जाना जाता है। राजा दशरथ का महल भी बहुत प्राचीन और भव्य है। इसके परिसर में काफी संख्या में जमा होकर श्रद्धालु भजन-कीर्तन करते रहते हैं।
चक्रवर्ती महाराज दशरथ महल समय: सुबह 8 से दोपहर 12 बजे तक और शाम को 4 से रात्रि 10 बजे तक खुला होता है।

अयोध्या में अन्य प्रमुख स्थलों में राम की पेदी, जानकी महल, श्री राम जानकी बिड़ला मंदिर, तुलसी स्मारक भवन, कलरामजी का मंदिर, डाटावान कुंड, गुरुद्वारा ब्रह्मा कुंड, लक्ष्मण किला, ऋषभदेव जैन मंदिर, वाल्मीकि रामायण भवन, राम कथा संग्रहालय, तुलसी चौरा इत्यादि जो आपके मन को अंखंड धार्मिक शांति प्रदान करेंगे।

कैसे पहुंचे अयोध्या

निकटतम हवाई अड्डाः लखनऊ 140 किलोमीटर की दूरी पर है।
निकटतम रेलवे स्टेशनः अयोध्या, लखनऊ मुगलसराय रेलवे प्रखंड का एक स्टेशन है। फैजाबाद अयोध्या का निकटतम मुख्य रेलवे स्टेशन है

आप भारत में इन सभी प्राचीन स्थानों पर जाएं और देश की संस्कृति का अनुभव करें। आखिरकार, किसी जगह को वास्तव में समझने और आनंद लेने के लिए, आपको पहले इस देश के  इतिहास को समझना चाहिए। यह ऐतिहासिक दौरा आपको बडे शहरों और भारत के छोटे शहरों की एक आनंददायक यात्रा पर ले जाएगा।

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